अन्ना की नर्सरी
राजनीति की नर्सरीयों में अन्ना पौधे उगा रहा है
भाग्य देश का लोकपाल के झण्डे से ही जगा रहा है
सेवा से निवृत्त बीज को खुद धरती में गाढ रहा हेेै
राजनीति की खरपतवारें,अब अनसन से उखाड रहा हेेै
निराई,गुडाई की उसकी खेती,रास सभी को आजाती है
अन्ना की नर्सरी आज तो भारतवाशी को भाती है
विस्वास,केजरी,किरण,सादिया,उसी खेत की फसलें है
विस्फोटक गुमनाम हैे अन्ना ,सभी उसी के असले है
बोली,भांषा, आव - भाव सब, एक स्वरों से आते हेैं
इस विरोध में बैर नही हेै,ये अन्ना ही बतलाते हेैं
हर दल ने गाँधी को पकडा, अब गाँधी में जान नही है
राजनीति में सत्य, अहिंसा, भारत की पहचान नही हेै
रालेगन में प्रशिक्षण का शिविर तिमिर को तोड रहा हेै
लगता है चाणक्य यंहा पर, चन्द्रगुत्त को जोड रहा है
आई.ए.एस,आई.पी.एस सारे,नेता से ज्यादा शातिर है
राजनीति के हाईब्रीड हेै, कलाकार है, सब कातिर है
किरण,केजरी की भांषा को सुनकर ही अनुमान लगालो
नही सुना तो,हर चैनल में बैठो ,अपने कान लगालो
एक दीदी है, एक है भैया, एक समुद्र में दोनो नैया
अन्ना नौका चला रहा हेै, सीधा साधा एक खेवेैया
चिन्तन हीन सियासी नेताओं को अन्ना भाँप रहा है
अनसन की धमकी देकर के ,औकातों को आँक रहा है
राजनीति की मजबूरी है, किस मूँह से विरोध करेंगे
जनता जिसको मान रही हेै,उसका क्यों अवरोध करेंगे
गाँधी ने भी धीरे-धीरे जनमत का मत मान लिया था
परिवर्तन के हर नुक्ते को,अपने मन में ठान लिया था
उन्ही पथों पर अन्ना का रथ लतपत हो कर दौड रहा हेै
अपने चेले घुसा-घुसा कर राजनीति को तोड रहा हेै
मै कवि आग हूँ अपनी दृष्टि से वो फसलें देख रहा हूँ
अन्ना के विस्फोटो पर भी, चिन्गारी को फेंक रहा हूँ
बूरा नही है, हो जाये तो , अच्छा हिन्दुस्तान बनेगा
तीव्र आग में तपकर सोना ही अब अपनी शान कहेगा।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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