नीलामी में भगवान
श्री राम ,अब फ्री राम हैं जो चाहे उपयोग में लेले
धर्म यंहा फुटबाल बन गया जो भी चाहे आकर खेले
राम, कृष्ण का ज्ञान नही हैे सारे तोते चिल्लाते हेैं
कुछ नेता तो राजनीति में राम,कृष्ण की ही खाते हैं
गुप्त नाम की सभी नुमाइस चौराहे में क्यों करते हेैं
परंतत्व के सागर में भी जहर सियासी क्यों भरते हैं
पत्थर भी तरते है,लेकिन यंहा तो मूरख तैर रहे हैं
कालनेमि क्यों कर में माला,राम नाम की फेर रहे हैं
राजनीति के व्यभिचारी भी राम को कन्धे में ढोते हेै
अल्लाह के गन्दे,बन्दे भी मंदिर, मस्जिद को रोते हेै
चर्च- पर्च और गुरूद्वारे में, धर्मो के उन्मादी देखो
डेढअरब की इन भीडो से तुम भी आओ पत्थर फेंको
आडम्बर के अम्बर सारे पैगम्बर बन घूम रहे हेैं
राम - नाम की चादर ओढे, देखो ढोंगी झूम रहे है
हर चुनाव में भगवानो की खुलकर नीलामी होती है
छोटे - मोटे ढोंगी छोडो, हस्ती सब नामी होती है
कोई सिंहल, तोगडिया है, कोई बाबा नंग लंगोटी
काम - वाशना के कीडे भी ,सेंक रहे है अपनी रोटी
आखिर कबतक भगवानो को ऐसे ही बदनाम करोगे
सीतामाता,अनुसुइया को कब तक झण्डू बाम करोगे
गुजराती तो हर-हर मोदी को मन्दिर में डाल रहे है
अवतारों में गाड-गोड्से ,गांधी समझ के पाल रहे हैं
कुछ वर्षों में राम - कृष्ण और, शंकर से आगे जायेगे
आने वाली राजनीति में नेता ही अवतार आयेगे
कितना ईश्वर इन मुर्दों को,और कंहा तक अब ढोयेगा
इस भारत में पैदा होकर और कंहा तक अब रोयेगा
तुम चाहे देखो ना देखो, मैं तो सब कुछ देख रहा हूँ
राम कृष्ण के सर-सन्धानो से शब्दों को फेंक रहा हूूूूँ
इन अभिशापो को पहचानो,भगवानो को उनपर छोडो
वेद,शास्त्र,गीता,रामायण के भावों को और ना तोडो
राजनीति में भगवानो की,जब-जब जो भी बात करेगा
कवि आग के अमरशब्द मे अभिशापित संघात मरेगा।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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