प्रचार बन्द-नेता अन्ध
अब चुनाव का शोर थम गया,घर-घर में भी चोर रम गया
तलुवे सबके चाट रहा है, वोट किसी के काट रहा है
किरण बेदी अब थकी पडी है,आर.एस.एस. तैयार खडी है
शिव सैनिक की लगी झडी है,बी.जे.पी की सभी कडी है
अब कांग्रेस भी भाग रही है, सोते - सोते जाग रही है
घर-घर घुसने के माहिर है,किस्से इनके जग जाहिर है
गांधी, नेहरू को संजोया, राहुल को घर-घाट से खोया
कांग्रेस में कोष नही है, मम्मी का अब दोष नही है
अन्ना चेले चमक रहे है ,दरवाजो पर धमक रहे है
छोड के अन्ना दल को भागे,देख रहा हूं, सभी अभागे
अमित शाह भी जग-जाहिर है,तोडफोड में भी माहिर है
बी. जे. पी. का स्वाभिमान है, सबसे ज्यादा परेशान है
सारे बस्ती छान रहे है , नंगो को पहचान रहे है
नेता सब परेशान रहे है, फिर भी सीना तान रहे है
चौबीस घण्टे जगे हुये है, गुणा - भाग में लगे हुये है
सब नंगो को निचोड रहे हैं, बोट - बैंक को जोड रहे है
फेस-बुकों और ट्वीटर पर एस.एम.एस घन्धा जारी है
मोदी का डर सता रहा है, नेता जी की लाचारी है
सारे हथकण्डे अपनाये, फिर भी नंगे पटा ना पाये
दश तारीक को पता चलेगा, किसने सुर में गाने गाये
जो भी घर को छोड के भागी,अच्छी है या बनी अभागी
या तो किस्मत ही फूटेगी, या समझो किस्मत है जागी
अगर भा.ज.पा. हार गयी, समझो सीमा के पार गयी
अच्छे दिन आने वाले थे, बद-किस्मत ही मार गयी
खाना - पीना छोडो भैया, अब ये नंगे - भूखे है सैंया
इन से पार लगेगी नैया,सब बछडे, साड, दुधारू गैया
सोने मत दो खाने मत दो,पकड के रक्खो जाने मत दो
दारू,मुर्गा सभी गलत दो,जो मत ना दे,उसको मत दो
सडके नापो, लडके नापो, खडे नही तो पकडके नापो
तडके नापो, चढके नापो, धडे नही धड-धड को नापो
आगे आगे बढ के नापो, नंगे - भूखे कडके नापो
घर मे घुसके गढ के नापो, बाहर मिले,जकड के नापो
एक बोट भी छुट ना जाये, घर की इज्जत लुटना जाये
अपनी मिट्टी कुट ना जाये,सत्ता हाथ से छुट ना जाये
खाना - पीना, सोना छोडो, नंगो के घर - घर में दौडो
राजनीति के फुन्सी फोडों, जंहा मिले जो वंही निचाडो
राजनीति की काल रात है, इसमें ही तो बिछी बिसात है
छल,बल,कपटी,ताकत झोंको,कुत्ता बनकर घरघर भौंको
ना बोलो,ना किसी को टोको,अपनी दाल सियासी छोको
जूता मारे, तब ना चौंको, किसी तरह बस,बोट को रोको
राजनीति के गड बड झालों,आग लगाकर पानी डालो
सबके दिल में सपने पालो, एक रात में रटा के टालो
दिल्ली में बारात चलेगी, किससे सत्ता हाथ मलेगी
कवि आग की घात चलेगी, नेता को औकात खलेगी।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
अब चुनाव का शोर थम गया,घर-घर में भी चोर रम गया
तलुवे सबके चाट रहा है, वोट किसी के काट रहा है
किरण बेदी अब थकी पडी है,आर.एस.एस. तैयार खडी है
शिव सैनिक की लगी झडी है,बी.जे.पी की सभी कडी है
अब कांग्रेस भी भाग रही है, सोते - सोते जाग रही है
घर-घर घुसने के माहिर है,किस्से इनके जग जाहिर है
गांधी, नेहरू को संजोया, राहुल को घर-घाट से खोया
कांग्रेस में कोष नही है, मम्मी का अब दोष नही है
अन्ना चेले चमक रहे है ,दरवाजो पर धमक रहे है
छोड के अन्ना दल को भागे,देख रहा हूं, सभी अभागे
अमित शाह भी जग-जाहिर है,तोडफोड में भी माहिर है
बी. जे. पी. का स्वाभिमान है, सबसे ज्यादा परेशान है
सारे बस्ती छान रहे है , नंगो को पहचान रहे है
नेता सब परेशान रहे है, फिर भी सीना तान रहे है
चौबीस घण्टे जगे हुये है, गुणा - भाग में लगे हुये है
सब नंगो को निचोड रहे हैं, बोट - बैंक को जोड रहे है
फेस-बुकों और ट्वीटर पर एस.एम.एस घन्धा जारी है
मोदी का डर सता रहा है, नेता जी की लाचारी है
सारे हथकण्डे अपनाये, फिर भी नंगे पटा ना पाये
दश तारीक को पता चलेगा, किसने सुर में गाने गाये
जो भी घर को छोड के भागी,अच्छी है या बनी अभागी
या तो किस्मत ही फूटेगी, या समझो किस्मत है जागी
अगर भा.ज.पा. हार गयी, समझो सीमा के पार गयी
अच्छे दिन आने वाले थे, बद-किस्मत ही मार गयी
खाना - पीना छोडो भैया, अब ये नंगे - भूखे है सैंया
इन से पार लगेगी नैया,सब बछडे, साड, दुधारू गैया
सोने मत दो खाने मत दो,पकड के रक्खो जाने मत दो
दारू,मुर्गा सभी गलत दो,जो मत ना दे,उसको मत दो
सडके नापो, लडके नापो, खडे नही तो पकडके नापो
तडके नापो, चढके नापो, धडे नही धड-धड को नापो
आगे आगे बढ के नापो, नंगे - भूखे कडके नापो
घर मे घुसके गढ के नापो, बाहर मिले,जकड के नापो
एक बोट भी छुट ना जाये, घर की इज्जत लुटना जाये
अपनी मिट्टी कुट ना जाये,सत्ता हाथ से छुट ना जाये
खाना - पीना, सोना छोडो, नंगो के घर - घर में दौडो
राजनीति के फुन्सी फोडों, जंहा मिले जो वंही निचाडो
राजनीति की काल रात है, इसमें ही तो बिछी बिसात है
छल,बल,कपटी,ताकत झोंको,कुत्ता बनकर घरघर भौंको
ना बोलो,ना किसी को टोको,अपनी दाल सियासी छोको
जूता मारे, तब ना चौंको, किसी तरह बस,बोट को रोको
राजनीति के गड बड झालों,आग लगाकर पानी डालो
सबके दिल में सपने पालो, एक रात में रटा के टालो
दिल्ली में बारात चलेगी, किससे सत्ता हाथ मलेगी
कवि आग की घात चलेगी, नेता को औकात खलेगी।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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