Saturday, February 28, 2015

                      मध्य - वर्ग
गजट-बजट  का  नंगो  के जीवन में असर नही होता
समपन्न हमेशा  भारत  में, लोकतन्त्र  का है न्यौता
स्वर्ग  धरा  में प्रजातन्त्र  समपन्न  घरों  में लाता है
मध्य - वर्ग  तो  शदियों  से,बे-मौत ही मारा जाता हैेे

उपर  चढना  तो  दूर  रहा, अब  नीचे गिरना दूभर है
पशू बना, ना देव बना, ये मध्य-वर्ग  क्यों किन्नर हेै
जी सकता ना मर सकता,अधमरा ही जीवन डोलेगा
अच्छे  दिन  की परिभांषा,अब मध्य-वर्ग ही बोलेगा

ये वर्ग त्रिशंकु सदा रहा, जो  हवा  में लटका रहता है
अर्थ-व्यर्थ  के  चक्कर  में कष्टों  का फटका सहता है
बच्चे  भी  दो  ही होते हैं,जीवन फिर  भी संघर्ष बना
ये मेरूदण्ड है भारत का जो सघर्षों का निष्कर्स बना

खुद  खडा  है  अपने  पैरों में,जीवन जीता है गैराें में
नदियों  से  मेल  नही  होता,बहता है सूखी नहरों में
अच्छे - अच्छे  सपने  भी  जीवन में देख नही पाता
मर कर समर समाजों से,जुडता है जबरन हर नाता

अच्छे दिन के चक्कर,क्यों मध्यवर्ग बलिदान हुआ
सम्पन्न वजट में मोदी के, वैभव का सम्मान हुआ
हर  बार  गरीबी  की  रेखा, नीचे ही गिरती जाती है
क्यों मध्य-वर्ग की रेखायें,वैभवता से भिंच जाती है

हे, शब्दो के सौदागर ,बाजार  में  घूम  के देख जरा
सीमा में बँधे  हुये  वेतन में, अपने सपने फेंक जरा
शर्म तुम्हें आजायेगी,  इस अच्छे दिन की भांषा से
याद  रहे, ये  सत्ता भी मिलती है इन्ही की आशा से

नून,तेल और लकडी का नेताओ को,कुछ ज्ञान नही
कष्टों में  जीवन  जीने  का, जोकर को अनुमान नही
अच्छे दिन के लच्छो से क्यों, मध्यवर्ग कुर्बान हुआ
कवि आग  की  भांषा में बस,मुर्दा ही बलिदान हुआ।।
            राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                  मो09897399815
      rajendrakikalam.blogspot.com

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