भारत भाग्य विधाता
मेरे बाप का क्या जाता हैे, वादे कर दो
ये वादे पूरे कब होते हैें, बस, आधे कर दो
मोदी ने जो किये हैं , पहले उनको देखो
कीचड कमल अमल है पहले उस पर फेको
सात दशक से कांग्रेस ने यही किया हेै
चोर, उचक्को ने भारत का खून पिया है
इसी बात का छोटे - मोटे दल खाते हेै
झूठ, कपट, छल प्रजातन्त्र की औकाते हेै
झोपड पट्टी राजनीतिक उद्योग खरा है
इतिहास गवाह है,नेता ने ये खेत चरा है
ये नंगे - भूखे राजनीति की हरियाली हेै
इस बंजर खेती के , नेता ही माली है
प्रजातन्त्र झोपड पट्टी से ही जिन्दा हेै
सत्ता पाओ, फिर तो नंगो की निन्दा है
ये राजनीति की नर्सरीयाँ उत्तम बीजों की
प्रथम पाठशाला है, सरकरी लीजों की
अरविन्द केजरी,मोदी हो या अटल बिहारी
लालूऔर मुलायम,ममता,ललिता प्यारी
ये झोपड पट्टी राजनीति को पनपाती है
इस गुरूकुल से नेता की पीढी आती है
ये नेताओं की भीड जुटाने ही आते हैें
पहले मुफ्त थे, अब तो ये ध्याडी पाते है
लोकतन्त्र की बुनियादों के ये पत्थर है
आँखों से ओझल हैं,जीवन भी बद्तर है
ये कुटिर उद्योग हर प्रांत में बिछा पडा है
हिन्दू,मुस्लिम,कौमों का ये अलग धडा है
नगर पालिका,पंचायत के शिशू निकेतन
ये राष्ट्र धरोहर संविधान के जन गण मन
भारत में नंगा ही सत्ता दिलवाता हेै
वादे करदो, मेरे बाप का क्या जाता है
हर नेता नंगो पर ही डोरे डाल रहा है
कवि आग,भारत को नंगा पाल रहा है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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