मेरा भारत महान
व्यापारी, नेता, साधू के इतिहासों को खोल सको तो
अभिनेता,दल्ले,अधिकारी पर भी हल्ला बोल सको तो
काली माया निकल आयेगी,हमको भी अरमान नही है
अब नंगे,भूखे,अंगले,कंगलो का ये हिन्दुस्तान नही है
भीख मांग कर खाने वाले अरब-खरब में खेल रहे हैं
नगे - भूखे देश के मालिक नेताओं को झेल रहे हैं
व्यवसायी का माल मिलावट पूरी जनता चबा रही है
फिल्मी दुनिया सारा पैसा परदेशों में दबा रही है
भगवानो को बेचने वालों पर भी ईश्वर मेहरबान हेै
व्यवसायों में चोरों की भी ऋषि, मुनि से पहचान है
आज देश की राजनीति में कालनीमि की बडी शान हेै
राम,कृष्ण की इस धरती में व्यभिचार का गुणगान है
अहिसुष्णता फैल रही है, अन्धों की भी आँख नही है
वाणी भूषण ,बुद्वि बल्लभ की भी अपनी शाख नही है
युवा शक्तियां इन मुर्दो का मत से मातम मना रही है
हर डाकू के पीछे चल कर, सबके बीहड बना रही है
विश्वविद्यालय राजनीति के कीडे ही तो पाल रहा है
अब नेता अपने डी.एन.ए. को हर बच्चे मे डाल रहा है
क्यों वर्णशंकरी पीढी, भारत की सीढी को तोड रही है
धर्म,ग्रन्थ और वेद शास्त्र को अपने हित में मोड रही है
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,इसाई अपने ही घर सींच रहे हैं
सारे मिलकर,दल,बल की संख्या से भारत भींच रहे हैं
अगडे,पिछडे,उँच, नीच के आरक्षण अब भी जारी है
कौम कबीलो के आरक्षण, अब आरक्षण में नारी हेै
डेढ अरब की जनसंख्या हेै अब भी हमको चैन नही है
सम्प्रदाय में बच्चे पैदा करने का कंही बैन नही है
डाकू,चोर,उचक्को की नजरों में भारत ही महान है
कवि आग की कविता में तो भ्रष्टाचारी राष्ट्रगान है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815





