भावाभिव्क्ति से लालबहादुर शास्त्री जी के जन्म दिवस पर एक क्रान्ति का अभिवादन
अनादर
सीधे - साधे नेताओं की इस भारत में बात नही हेै
प्रजातन्त्र में बुनियादों की आज कहीं औकात नही है
चापलूस और चोर - डकैतों की ही तो भारत माता है
मुझे बताओ लाल बहादुर,हम तुम को कितना भाता है
गांधी,नेहरू, और पटेल के साथ कदम को रखने वाला
भगतसिंह,शेखर, सूभाष की, कुर्बाानी का था मतवाला
राजगुरू,सुखदेव सिंह और बिसमिल्ला का पथ अनुगामी
इस भारत की दीन दशा का चिन्तन,मन्थन अन्तर्यामी
इस उपग्रह को गांधी ग्रह की छाया से क्यों दबा रहे हो
महापुरूषों को राजनीति के उपकरणो से चबा रहे हो
छोटे - मोटे मेघ-वेग से दिनकर विचलित कब होता है
अपनी गरिमा, षडयन्त्रों से राष्ट्र हमेशा ही खोता है
माना गाँधी जाग रहे थे, और भी जिन्दे जगे हुये थे
अपने - अपने ढंग से भारत की मुक्ति मे लगे हुये थे
कौन अहिंसा से डरता है, एक उदाहरण मुझे बताओ
जो हम पर कुर्बान हुये हैं ,थोडा उन से भी शर्माओ
राजनीति से अब सूभाष और लाल बहादुर खोल रहे हो
किस मूंह से इन महापुरूषों की जय भारत में बोल रहे हो
बचे - खुचे इन महापुरूषों को राजनीति में बांट रहे हो
वोट-बैंक की शल्य चिकित्सा से लाशों को छांट रहे हो
कुछ बचे-खुचे बुनियादी भारत वाशी ही ये मान रहे हैं
जय जवान और जय किसान से भारत को पहचान रहे हैं
आज राष्ट्र के षडयन्त्रों से भारत माँ शर्मिन्दा है
लाल बहादुर कवि ‘आग’ की कलम अभी तक जिन्दा है ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
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