Friday, February 13, 2015

          मनोज ध्यानी जी के आग्रह पर
                   टीचर और फ्यूचर
गुरू,अध्यापक,और टीचर  में  क्या फर्क है,मुझे बताओ
अतंरग चेतना,दिल,दिमाग में कंहा तर्क हेै मुझे बताओ
क्यों गुरूकुल की  शिक्षा, दीक्षा,  वर्तमान से तोल रहे हो
वेतन, भत्ते  वाले  टीचर  को  गुरूजी  क्यों  बोल  रहे हो

सरकारी   संसाधन    पाने   वालो   में   आदर्श  कंहा है
भटक रहे  हैं  युवा  देश  के  शिक्षा   में  निष्कर्श कंहा है
पौराणिक  शिक्षा की बुनियादों  पर  भारत आज खडा है
वर्तमान  की  शिक्षा  में  तो  वैमनस्य  अल्फाज बडा है

गुरूकुल  की  शिक्षा  में  शिक्षक  आदर्शों  में ही जीते थे
हर विकार को  मन-मन्थन के निष्कर्शो  से ही सीते थे
छात्र बने महापात्र जगत के,शिक्षक  की  अभिलाशा थी
कष्ट-हीन  हो  राष्ट्र - सुरक्षा, शिक्षा  की  ये परिभांषा थी

संस्कारहीन पर भी संस्कारो का प्रक्षेपण  एक कला थी
सत्य,धर्म पर जीना मरना गुरूकुल की नेक सलाह थी
हर मजहब  में प्रेम, प्यार  हो, समदृष्टि दर्शन होता था
शिक्षक  छोटी सी बगिया में,बीज ज्ञान के  ही बोता था

आज देश मे घर-घर शिक्षा से यौवन क्यों  भटक रहे हैं
बे - रोजगारी, भ्रष्टाचारी, शूली  पर  क्याें   लटक  रहे हैं
विश्वविद्यालय  राजनीति  की,संसद में तब्दील हो गये
आज  देश  के  चौराहों पर ,युवक देश की कील हो गये

इन परिणामो को सुन कर भी, आदर्शों की होड लगी है
ऐसी शिक्षा,आज देश में, मुझको तो बस,कोढ. लगी है
एल.आइ.सी.एजेण्ट गुरूजी,ट्यूशन परमानेण्ट गुरूजी
प्रापर्टी  डीलर   में  देखो, कंंहा - कंहा  सरवेैण्ट  गुरूजी

शिक्षाओं के इस विरोध में लिखने  का भी शौक नही है
शिक्षा  तो  आदर्श  जगत है राजनीति का चौक नही है
अच्छा   होता    प्राइवेट   स्कूलों  में  अवरोध  लगाते
एक  ही  शिक्षा  देश में  होती, सारे बच्चे लुफ्त उठाते

मैं  भी   कहता   भारत  माता, तेरे  बच्चे  समदर्शी हैं
भेद-भाव  का  घाव  नही  है,शैशवता  के  ममस्पर्शी हैं
कविआग का हाथ जोड कर,नेता,गुरू से यही सवाल है
अपने  अन्दर  झांको, देखो, यौवनता में कहा बवाल है।।
             राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                     9897399815
     rajendrakikalam.blogspot.com

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