कानून-पथ
दाउद भी अब घर आने की सोच रहा हेै
कानून हमारा गुनाह सभी के पोंछ रहा है
बडे - बडे अधिवक्ता सीना तान रहे है
अपराध भाई के ,धाराओं में छान रहे हेै
समय आगया आत्म सर्मपण कर दे भाई
सलमान खान की देखा कैसे बेल कराई
कानूनो के जोड-तोड के सब माहिर हैं
गुण्डों की रक्षा होती है ,जग -जाहिर है
अधिवक्ता,जज, गवाह सभी तैयार खडे हैं
लोकसभा और राज्य सभा केअलग धडे हेैं
कानूनो में परिवर्तन भी हो ही जाता हेै
इस राजनीति में खूनी कतली ही आता है
तू छंटा-छंटाया व्यभिचारी, मायाधारी है
इस फिल्मी दुनियां में तेरे किस्से जारी है
नर - नारी किरदार,तुझे सब मान रहे हैं
तेरी महफिल के भारत में गुणगान रहे हैं
चूनाव जेल के अन्दर से भी लड सकता हेै
ये प्रजातन्त्र है, उपर भी तू चढ सकता है
बोट-बैंक की राजनीति हैे माया बाँटो
हिन्द,मुस्लिम दंगो में मन-मानव काटो
दुर्भाग्य था मेनन का , जो बच ना पाया
बडे - बडे कानून पिता ने जोर लगाया
रात-रात भर सबने अपने सिर को पटका
बचा नही पाये, आखिर में फासी लटका
तेरे दर्शन को नेता और जज तरस रहे है
कुछ अधिवक्ता तेरे नाम से हरष रहे है
एक मात्र आतंक वाद का तू ही बाप है
तू कोर्ट,कचहरी,पञ्चायत है,तू ही खाप है
फांसी कंहा है, आजीवन सोन्दर्य छटा है
राष्ट्र - पति अनुमोदन से ये पाप कटा है
भारत में कोई गवाह मिले औकात नही है
न्यायालय में सच्चायी की जात नही है
अब कानूनो से भारत की इज्जत खोती हेै
आज कचहरी अधिवक्ता,जज से रोती हेै
गुनाहगार,सर चढा है खुलकर बोल रहा है
कवि आगऔकात नियम की खोल रहा हेै।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
दाउद भी अब घर आने की सोच रहा हेै
कानून हमारा गुनाह सभी के पोंछ रहा है
बडे - बडे अधिवक्ता सीना तान रहे है
अपराध भाई के ,धाराओं में छान रहे हेै
समय आगया आत्म सर्मपण कर दे भाई
सलमान खान की देखा कैसे बेल कराई
कानूनो के जोड-तोड के सब माहिर हैं
गुण्डों की रक्षा होती है ,जग -जाहिर है
अधिवक्ता,जज, गवाह सभी तैयार खडे हैं
लोकसभा और राज्य सभा केअलग धडे हेैं
कानूनो में परिवर्तन भी हो ही जाता हेै
इस राजनीति में खूनी कतली ही आता है
तू छंटा-छंटाया व्यभिचारी, मायाधारी है
इस फिल्मी दुनियां में तेरे किस्से जारी है
नर - नारी किरदार,तुझे सब मान रहे हैं
तेरी महफिल के भारत में गुणगान रहे हैं
चूनाव जेल के अन्दर से भी लड सकता हेै
ये प्रजातन्त्र है, उपर भी तू चढ सकता है
बोट-बैंक की राजनीति हैे माया बाँटो
हिन्द,मुस्लिम दंगो में मन-मानव काटो
दुर्भाग्य था मेनन का , जो बच ना पाया
बडे - बडे कानून पिता ने जोर लगाया
रात-रात भर सबने अपने सिर को पटका
बचा नही पाये, आखिर में फासी लटका
तेरे दर्शन को नेता और जज तरस रहे है
कुछ अधिवक्ता तेरे नाम से हरष रहे है
एक मात्र आतंक वाद का तू ही बाप है
तू कोर्ट,कचहरी,पञ्चायत है,तू ही खाप है
फांसी कंहा है, आजीवन सोन्दर्य छटा है
राष्ट्र - पति अनुमोदन से ये पाप कटा है
भारत में कोई गवाह मिले औकात नही है
न्यायालय में सच्चायी की जात नही है
अब कानूनो से भारत की इज्जत खोती हेै
आज कचहरी अधिवक्ता,जज से रोती हेै
गुनाहगार,सर चढा है खुलकर बोल रहा है
कवि आगऔकात नियम की खोल रहा हेै।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

























