अन्ना की तमन्ना
आज देश में राजनीति तो केवल अन्ना खेल रहा है
राजनीति के हर कुडमे में अपने चेले पेल रहा है
क्या राम भक्त अब महाभारत को दिल्ली में दोहरायेगें
किरण , केजरी कोई भी हो अन्ना के चेले आयेगें
आज देश में राजनीति तो केवल अन्ना खेल रहा है
राजनीति के हर कुडमे में अपने चेले पेल रहा है
क्या राम भक्त अब महाभारत को दिल्ली में दोहरायेगें
किरण , केजरी कोई भी हो अन्ना के चेले आयेगें
काँग्रेस और बी. जे. पी. में अन्ना गुरके घुस जायेगे
धीरे - धीरे स. पा, बा. स. पा, कम्युनिष्ट में भी आयेगे
छोटे - मोटे दल को केवल अन्ना ही अब भाँप रहा है
किस में कितनी गहरायी है ,इंच टेप से नाप रहा है
धीरे - धीरे स. पा, बा. स. पा, कम्युनिष्ट में भी आयेगे
छोटे - मोटे दल को केवल अन्ना ही अब भाँप रहा है
किस में कितनी गहरायी है ,इंच टेप से नाप रहा है
सब धीरे - धीरे भारत वाशी आप पार्टी हो जायेंगे
गाँधी को हम भूल गये ,अब अन्ना-अन्ना ही गायेंगे
इस बूढे की राजनीति से योद्या सारे फेल हो गये
महाभारत के सभी शिखण्डी अबअन्ना के खेल हो गये
गाँधी को हम भूल गये ,अब अन्ना-अन्ना ही गायेंगे
इस बूढे की राजनीति से योद्या सारे फेल हो गये
महाभारत के सभी शिखण्डी अबअन्ना के खेल हो गये
लोकपाल से आप पार्टी , बाप पार्टी बन जाती है
राजनीति के सारे दल में, अन्ना की पीढी आती है
अन्ना ये कुछ भी पूछोगे,मौन हुआ सब कुछ कहता है
आज समुद्र भी राजनीति का अन्ना दरिया मे बहता है
राजनीति के सारे दल में, अन्ना की पीढी आती है
अन्ना ये कुछ भी पूछोगे,मौन हुआ सब कुछ कहता है
आज समुद्र भी राजनीति का अन्ना दरिया मे बहता है
शब्दो के सौदागर सारे, ये बुढा अब चाट रहा है
धीरे - धीरे सत्ता - पत्ता अब चेलो में ही बाँट रहा है
चेले चाहे कंही खडे हों, बाप उसी को मान रहे है
अन्ना रालेगंज में बैठे, खुशी से सीना तान रहे है
धीरे - धीरे सत्ता - पत्ता अब चेलो में ही बाँट रहा है
चेले चाहे कंही खडे हों, बाप उसी को मान रहे है
अन्ना रालेगंज में बैठे, खुशी से सीना तान रहे है
आई. ए.एस, आई.पी. एस भी, प्रशिक्षण उससे पाते है
अब धीरे - धीरे भांप रहे है, सत्ता की क्या औकाते है
कांग्रेस और बी. जे. पी को दीमक बनकर चाट रहे हैं
ये पहाड के वो दरिया है, पत्थर को भी काट रहे है
अब धीरे - धीरे भांप रहे है, सत्ता की क्या औकाते है
कांग्रेस और बी. जे. पी को दीमक बनकर चाट रहे हैं
ये पहाड के वो दरिया है, पत्थर को भी काट रहे है
किरण, केजरी बिजली, पानी, नारी सुरक्षा चिल्लाते है
सोच विचार कर दोनो मुद्दे, जनता के सन्मुख लाते है
जे.पी, लाहिया, गाँधी, नेहरू धूल सडक की फाँक रहे हैं
इन सबके इतिहासों को अब अन्ना ही तो आँक रहे है
सोच विचार कर दोनो मुद्दे, जनता के सन्मुख लाते है
जे.पी, लाहिया, गाँधी, नेहरू धूल सडक की फाँक रहे हैं
इन सबके इतिहासों को अब अन्ना ही तो आँक रहे है
ये मेरा चिन्तन कहता है, अन्ना गाँधी दबा रहा है
बिना दाँत के राजनीति को ये बूढा ही चबा रहा है
आर.एस.एस. हो, बी.जे.पी.हो, कांग्रेस भी फेल होगयी
अन्ना के भवनो के आगे राजनीति खपरैल हो गयी
बिना दाँत के राजनीति को ये बूढा ही चबा रहा है
आर.एस.एस. हो, बी.जे.पी.हो, कांग्रेस भी फेल होगयी
अन्ना के भवनो के आगे राजनीति खपरैल हो गयी
वर्तमान में आज भविष्यत, केवल अन्ना देख रहा हूँ
आप,ताप को शब्द छन्द की चिन्गारी से फेंक रहा हूँ
कवि आग के चिन्तन के मन्थन को ही सही पाओगे
मैं भविष्य को देख रहा हॅू, मेरी ही कविता गाओगे।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
आप,ताप को शब्द छन्द की चिन्गारी से फेंक रहा हूँ
कवि आग के चिन्तन के मन्थन को ही सही पाओगे
मैं भविष्य को देख रहा हॅू, मेरी ही कविता गाओगे।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
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