शपत में खपत
अब क्यों गोपनीयता की शपत चौराहों में
अब क्यों कुचलते हो सियासत पाँवों मे
अब क्या दिखाना चाहते हो देश को
अब क्यों तोडते हो राष्ट्र के परिवेष को
ये अदालत क्यों जलालत हो रही है
चौराहो में भी अब वकालत हो रही है
ये सियासत राष्ट्र को क्यों खो रही है
अब देख लो जनता गधों को ढो रही है
सब जानते हे इस शपत में क्या लिखा हेै
ये राष्ट्र भी तो इस शपत से ही बिका है
कौेन हैे जो इस शपत को मानता हेै
अब ये जमाना लोकशाही जानता है
सिद्यान्त से इस भीड को क्यों नापते हो
क्यों वोट के कारण सडक में हापते हो
मिल गया जनमत कुछ करके दिखाओ
चौराहे की सर्कस ,सदन को ना बनाओ
वही मदिरा पुरानी बोतलों में भर रही है
जनता नशे मे चूर, अब भी मर रही है
लेवल बदल कर क्या हमे दिखलाओगे
अब गीत तो तुम भी पुराने गाओगे
जनसर्मथन ही तो सब कुछ कह रहा है
बे- भाव के क्यों भावना मे बह रहा है
रिक्तता तुम को मिली भरके दिखाओ
आग की मानो तो कुछ करके दिखाओ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
अब क्यों गोपनीयता की शपत चौराहों में
अब क्यों कुचलते हो सियासत पाँवों मे
अब क्या दिखाना चाहते हो देश को
अब क्यों तोडते हो राष्ट्र के परिवेष को
ये अदालत क्यों जलालत हो रही है
चौराहो में भी अब वकालत हो रही है
ये सियासत राष्ट्र को क्यों खो रही है
अब देख लो जनता गधों को ढो रही है
सब जानते हे इस शपत में क्या लिखा हेै
ये राष्ट्र भी तो इस शपत से ही बिका है
कौेन हैे जो इस शपत को मानता हेै
अब ये जमाना लोकशाही जानता है
सिद्यान्त से इस भीड को क्यों नापते हो
क्यों वोट के कारण सडक में हापते हो
मिल गया जनमत कुछ करके दिखाओ
चौराहे की सर्कस ,सदन को ना बनाओ
वही मदिरा पुरानी बोतलों में भर रही है
जनता नशे मे चूर, अब भी मर रही है
लेवल बदल कर क्या हमे दिखलाओगे
अब गीत तो तुम भी पुराने गाओगे
जनसर्मथन ही तो सब कुछ कह रहा है
बे- भाव के क्यों भावना मे बह रहा है
रिक्तता तुम को मिली भरके दिखाओ
आग की मानो तो कुछ करके दिखाओ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
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