Tuesday, May 31, 2016

दरिद्र-दाँव
भीम राव ने जिनको अब तक पाला पोषा
हरिजन को इस राजनीति ने हरदम कोसा
आज दलित को पलित बनाकर पाल रहे हैं
सब राजनीति मे सत्ता ही खंगाल रहे हैं

तुम समरस का स्नान कुम्भ में करके आये
आध्यात्म जगत में भेदभाव भरसक फैलाये
अब अगडे,पिछडे ,कंहा - कंहा कितने ढूंढोगे
इस राजनीति से किन-किन को चेला मूंडोगे

अमित शाह ने हरिजन के घर रोटी खायी
इस राम भक्त ने बोट-बैंक पर नजर घुमायी
घी की चुपडी रोटी फिर भी चाट रहे हो
अब बोट बैंक से ही हरिजन को काट रहे हो

सब ने अब तक हरिजन की खेती काटी है
अगडी - पिछडी लाश सियासत ने बांटी है
क्या हरिजन की रोटी परिवर्तन लायेगी
ये सर्कस अब कब तक जनमत को भायेगी

कंही राहुल,अखिलेष,अमितशाह रोटी खायें
बोट - बैंक में सभी सियासी गोट बिछायें
अब मैं सवर्ण हूँ, मेरी तो औकात नही है
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैष्य, वोट की जात नही है

ये कांगेस की खेती माया चाट चुकी है
हरिजन और सवर्ण बराबर बांट चुकी है
ये बंटे खेत सब चकबन्दी से एक हो गये
ऱाजनीति की नौका में अब छेक हो गये

हे, दरिद्र नारायण के जीवन रखवालों
भारत में महाभारत को फिर से ना पालो
हरिजन की रोटी खाने से क्या होता है
कवि आग ये बीज सदा नेता बोता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com  

सियासत का हथियार
तुम भी अपने घर को देखो, मैं भी अपना घर देखूंगा
तुम भी जुमले फेंक रहे हो, मैं भी जुमले ही फेकूंगा
जनता को बेवकूफ बनाकर ही तो हम सत्ता पाते हैं
अपशब्दो के तीर चलाकर अपना राष्ट्र गीत गाते है

मैं सबूत मांगूगा तुमसे ,तुम कहना मैं देख रहा हूँ
तुम हमसे आतंकी मांगो, मै बोलूगा फेंक रहा हूँ
चार दिनो का हल्ला गुल्ला,जनता सब कुछ भूल जायेगी
फिर अगला विस्फोट करेंगे,कुछ दिन तक उसको गायेगी

अच्छी-अच्छी नश्ल के तोते हर चैनल में चुनकर डालो
अच्छे-अच्छे,जुमले, भाषण, तर्को से जनता को पालो
हिन्दू, मुस्लिम, कौम, कबीले ये ही तो अपनी खेती है
सम्प्रदाय,मजहब की क्यारी, बिन माँगे सब कुछ देती है

तेरे संघी मेरे मुल्ले इस नेक काम में लगे हुये हैं
दोनों मुल्को की जनता भी जान रही, हम जगे हुये हैं
साठ साल तक कांग्रेस ने यही खेल मिलकर खेला है
तेरी जनता भी मंजनू है, मेरी जनता भी लैला हेै

अपना खेल चलाकर तुमने परदेशों में ख्याति पायी
तेरे कारण मेैंने अपने घरवालों की गाली खायी
चमत्कार है ,हम दोनों को फिर भी जनता मान रही है
मुर्दा जनता हम दोनों के कारण सीना तान रही है

कुछ तुम मूझसे,कुछ मैं तुमसे जनमत के जुमले सीखेंगे
अल्लाह की मेहर होगी तो सत्ता में फिर से दीखेंगे
काशमीर दोनों मुल्कों को राजनीति वरदान मिला है
मुझको पाकिस्तान मिला है,तुमको हिन्दुस्तान मिला है

संसद,बम्बई,पठानकोट और सरहद पर भी कुछ होता है
अब रावलपिण्डी, राँची मेरी कब्रें, मस्जिद को ढोता है
खेल बराबर ,दोनो मुल्को का, तब तक जेहाद चलेगा
कवि आग आतंकवाद तो, राजनीति में खूब फलेगा।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com 

Monday, May 30, 2016

आश्वासन
आज तो नेता से जनता आश्वासन पा रही है
राजनीति हर जगह पर आश्वासन गा रही है
आश्वासन किस तरह आधार बनता जा रहा है
राष्ट्र को तो भ्रष्टता का आश्वासन खा रहा है

गूंज है करतल ध्वनि की पागलों की बात में
विश्वास हमको हो रहा है पागलों की जात में
आश्वासन देख लो मन्दिर कहीं कश्मीर का
नेता जनाजा बन गया मेरे वतन की पीर का

अब युवा भी आश्वासन से जवानी खो रहा है
आश्वासन की जवानी से वतन भी रो रहा हेै
आश्वासन युद्व में और बेरोजगारी आड़ में
झोंकता है किस तरह से आश्वासन भाड़ में

आश्वासन के लिये दल भी सियासी बन गये
लाश पर भी आश्वासन के कफन क्यों तन गये
विडंबना है आज जनता आश्वासन पा रही है
बज रही हैं तालियाँ बस आश्वासन खा रही है

नित हो रहे पैदा शिशू बस आश्वासन के लिये
र्निलक्ष्य जीवन हो गया है मात्र जीने के लिये
स्वप्न तो साकार अपने भ्रष्ट नेता कर रहा है
आस्था में आश्वासन की वतन क्यों मर रहा है

गेरूवा भी आश्वासन दे रहा है धर्म का
बन गया उपहास देखो आश्वासन कर्म का
पागलों की भीड़ में ये आश्वासन बोलता है
किस कदर मठ मन्दिरों में आश्वासन डोलता है

आंकडा जनता का अरबों से भी उपर जा रहा है
सूसुप्त है मेरा वतन बस आश्वासन खा रहा है
औखात हिन्दुस्तान की ये राजनीत जानतीे है
इसलिये तो आश्वासन के ही तम्बू तानती है

भ्रष्टता को काटने का आश्वासन मिल रहा है
विपक्ष के चेहरों में देखो नूर कैसा खिल रहा है
आश्वासन लड़ रहा है आश्वासन के लिये
दिख रहा है द्वन्द में भी फंद सासन के लिये

परदेश भी पी.एम. को पूरा आश्वासन दे रहा है
आश्वासन से मजा पी.एम. भी पूरा ले रहा है
आश्वासन के ही कारण,सब सियासी लड रहे हैं
इस देश में तो आश्वासन के कीडे पड रहे हैं

आश्वासन ही तो हम कितने युगों से पा रहे हैं
जिन्दगानी आश्वासन की ही जीते जा रहे है
लम्बी उमर है आस्था और आश्वासन पाइये
राजनीति की सफलता आश्वासन खाइये
आश्वासन राजनीति भी हमी को दे रही है
अब भ्रष्टता भी आश्वासन से मजा ही ले रही है
मिल रहा है आश्वासन आग इस तूफान में
आश्वासन बिक रहा है आज हिन्दुस्तान में।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com 

Sunday, May 29, 2016

विज्ञापन
हर पेपर, चेैनल मे देखो विज्ञापन है
राजनीति का लावारिस ये टुच्चापन है
जनता का ये खून - पसीना अखवारों में
प्रतिष्पर्धा भी लगी पडी हेै सरकारों में

हर पेपर में विज्ञापन की रद्दी बेचो
ये लावारिस प्रजातन्त्र है गद्दी बेचो
राजनीति की गाली भद्दी - भद्दी बेचो
षडयन्त्रो के जाल बुनो सब सद्दी बेचो

हे,राजनीति के फनकारो ये हमे बताओ
अमिताभ की जय बोलो झलसों में लाओ
प्रजातन्त्र मे भाण्ड सियासत खेल रहे हैं
हम राजनीति में वालीवुड को झेल रहे हेैं

बे - रोजगारी, मंहगाई कही नाम नही है
ये चौथा स्तम्भ देश का ,काम यही है
चैनल सब नीलाम खडे हैं, बोल रहे हैं
हर खबरों में रंग सियासी घोल रहे है
सभी सियासी देश की माया लूट रहे हैं
भारत मां की मिट्टी मिलकर कूट रहे है
भाषण से लगता है भारत स्वर्ग धाम हेै
राम,कृष्ण अल्लाहमिंया का यही गाम हेै

पर हाल कब्र का हम मुर्दे ही झेल रहे हेैं
प्रहलाद जलाकर भी हम होली खेल रहे हैं
सत्य,अहिंसा,प्रेम, शान्ती की ही बाते हेैं
बस,अहिसुष्णता आज हमारी औकाते हेै

विज्ञापन और ओछे भाषण बन्द करोगे
राजनीति मे भाण्डो का पतिबन्ध करोगे
ये महगायी, भुखमरी, गरीबी मजबूरी है
कवि आग ये सत्ता ही कातिल छूरी है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

विज्ञापन
हर पेपर, चेैनल मे देखो विज्ञापन है
राजनीति का लावारिस ये टुच्चापन है
जनता का ये खून - पसीना अखवारों में
प्रतिष्पर्धा भी लगी पडी हेै सरकारों में

हर पेपर में विज्ञापन की रद्दी बेचो
ये लावारिस प्रजातन्त्र है गद्दी बेचो
राजनीति की गाली भद्दी - भद्दी बेचो
षडयन्त्रो के जाल बुनो सब सद्दी बेचो

हे,राजनीति के फनकारो ये हमे बताओ
अमिताभ की जय बोलो झलसों में लाओ
प्रजातन्त्र मे भाण्ड सियासत खेल रहे हैं
हम राजनीति में वालीवुड को झेल रहे हेैं

बे - रोजगारी, मंहगाई कही नाम नही है
ये चौथा स्तम्भ देश का ,काम यही है
चैनल सब नीलाम खडे हैं, बोल रहे हैं
हर खबरों में रंग सियासी घोल रहे है
सभी सियासी देश की माया लूट रहे हैं
भारत मां की मिट्टी मिलकर कूट रहे है
भाषण से लगता है भारत स्वर्ग धाम हेै
राम,कृष्ण अल्लाहमिंया का यही गाम हेै

पर हाल कब्र का हम मुर्दे ही झेल रहे हेैं
प्रहलाद जलाकर भी हम होली खेल रहे हैं
सत्य,अहिंसा,प्रेम, शान्ती की ही बाते हेैं
बस,अहिसुष्णता आज हमारी औकाते हेै

विज्ञापन और ओछे भाषण बन्द करोगे
राजनीति मे भाण्डो का पतिबन्ध करोगे
ये महगायी, भुखमरी, गरीबी मजबूरी है
कवि आग ये सत्ता ही कातिल छूरी है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com


Saturday, May 28, 2016

राष्ट्र के भक्षक,राष्ट्र के रक्षक
क्यों सारे नेता इस भारत को स्वर्ग बनाना चाहते हेैं
क्यों अपने-अपने उपन्यास,उपसर्ग बनाना चाहते हेैं
क्यों राजनीति के दल हजार,वृत-वर्ग बनाना चाहते हेैं
क्यों लगता है सब काशमीर,गुलमर्ग बनाना चाहते हैं

एके देश का संविधान है, फिर भी देखो खींचा तानी
भारत की सारी नदियां हैं, सबका अपना-अपना पानी
सारी धरती जुडी हुयी हैअलग प्रान्त की अलग कहानी
तैंतिस कोटि देव की धरती,सबके अपने-अपने ज्ञानी

36 प्रान्त की भारत माता लुटि-पिटि दुख झेल रही है
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,इसाई से रो-रो कर खेल रही है
बोली,भाँषा,संस्कारो से सिसक-सिसक कर हांप रही हेै
भारत माता हिन्दुस्तानी बच्चों से ही काँप रही है

कहने को तो लोकतन्त्र है ,पर जनता तो दास हो गयी
बोट-बैंक की राजनीति से मानवता उपहास हो गयी
मर्यादा, संस्कार, संस्कृति नेताओ से नाश हो गयी
भारत मां की बंजर धरती प्रजातन्त्र की खास हो गयी

भुखमरी,गरीबी,बे-राजगारी के घर-घर अम्बार लगे हेैं
शब्दों के सोैदागर सारे डाकू इज्जतदार लगे हेैं
लावारिस खेती को चरने,सब पशुओ के डार लगे हेैं
इस बीहड में देश लूटने बाले सब अवतार लगे हेैं

सत्ता और विरोधी दोनो मिलकर कच्छे खोल रहे हैं
मुर्दे नेता, मुर्दा जनता भारत की जय बोल रहे हेैं
जनता की औकात सियासी,अपने ढंग से तोल रहे हैं
अधिकारी, व्यवसायी, साधू, आवारा हैं, डोल रहे हैं

राष्ट्र सुरक्षा की चिन्ता है फिर भी देखो झगड रहे हेेैं
लोकतन्त्र के मन्दिर में भी भक्त,भक्त को रगड रहे हेैं
अहिसुष्णता फैल रही है कंही कुशल और क्षेम नही हेै
कवि आग इन नेताओं का,भारत से कुछ प्रेम नही हेै।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com