Sunday, February 8, 2015

              भांषा का झांसा
मोदी   तेरे  शब्दो  में, अब   जान   नही है
जो  हमने  सोचा  था, वो  पहचान   नही हेै
भाषण में जो धार दिखी  थी कंहा  खो गयी
नेताओं की  लोकल - भांषा , वही  हो गयी
बूरा  ना  मानो ये  भारत की ,शान  नही है
मोदी   तेरे   शब्दो  में,  अब   जान नही है

शेर  सडक  में  घूमेगा   तो    कौन  डरेगा
चौराहों  में   तेरी   इज्जत    कौन   करेगा
चूहों  से  क्या  शेर  कभी   लडता   है भाई
विधानसभा में पीएम.ने भी  कविता गायी
भारत माँ  के   तुमसे  ये  अरमान  नही है
मोदी  तेरे  शब्दो   में,  अब   जान  नही है

तेरे  कारण अलुवे - ठलुवे सब पार हो गये
पहले  दुश्मन  कम  थे, अब हजार हो गये
आर.एस.एस. चाहती  है,मेरी भांषा  बोलो
शब्द संघ के मूंँह में डालो  फिर मूँह खोलो
क्या बिना संघ के तेरी भी  पहचान नही है
मोदी  तेरे  शब्दो  में,   अब   जान  नही है

जो हार गये थे,उन्हें  भी  कुर्सी  बांट रहे हो
अब  नौ-रत्नो में  सभी विरोधी  छांट रहे हो
ये  बाबा  बच्चे  पैदा  करने   को  कहते हैं
डेढ अरब  को  हम  पहले  से   ही सहते हैं
ये  तो  कोई  राष्ट्र - भक्त   फरमान  नही हैं
मोदी  तेरे  शब्दो  में,   अब   जान  नही है

अटल बिहारी  भी  लडते  थे   यही लडायी
पीएम.बने तो आरएसएस .ने खोदी खायी
तब  सारे जोगी  बने  विरोधी  एक हो गये
तोगडिया  से  अटल बिहारी,  खुदी रो गये
अब ये भारत है, मुर्दो का  शमशान नही है
मोदी  तेरे  शब्दो    में,  अब  जान  नही है

जिनके  मूह  मे  शब्द नही  ,अब गुर्राते है
हर  चैनल  में  जहरीले    भाषण   गाते है
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,इसाई  क्यों जारी है
अब  मोदी  हल्का, सत्ता  में   चेले  भारी है
सम्पदाय  का   भारत में  गुणगान नही हेै
मोदी  तेरे  शब्दो  में,  अब   जान   नही है

आज  तू  ही  मेरे भारत  का मुकुट-मोर है
पूरी  दुनियां   में   तेरा   ही   मचा  शोर है
ये  चूहे, बिल्ली गले  में घण्टी   टाँग रहे है
अपनी  आशा-तृष्णा  तुझ  से   मांग रहे है
अगर  आग  में तेज नही, पहचान  नही हेै
मोदी  तेरे  शब्दों  में,  अब    जान  नही है।।
         राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
              मो0 9897399815
    rajendrakikalam.blogspot.com

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