बजट का गजट
दश रूपये में पूडी, सब्जी हर स्टेशन में दिलवादेते
अच्छा पानी हर गरीब को स्टेशन में पिलवा देते
थर्डक्लास के वेटिंग रूमो में भी झाडू लगवा देते
जिन डिब्बों में फटी सीट है उनको थोडा सिलवा देते
थोडा सा चूना पुतवाते जंहा - जंहा धब्बे काले हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें हैं
आरक्षण मांगो तो वेटिंग, कम्प्यूटर भी बोल रहा है
टी.टी. सबकी औकातों को,ट्रेन के अन्दर तोल रहा है
मुंह मांगा पैसा फेंकोगे, तब जुगाड कुछ हो जाता है
मैं तो ये ही देख रहा हूं, ट्रेनो को टी. टी. खाता है
बाहर से सब श्वेताम्बर हैं भीतर सब पूरे काले हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
पूछ-ताछ की खिडकी खाली, बाबू बाहर घूम रहा है
टिकिट बाबू भी लगा जुगाड में,वेटिंग वाले ढूंढ रहा है
पैसों में आरक्षण सुविधा, अब दल्ले ही बांँट रहे हैं
एम.पी,एम.एल.ए. के कोटे, ए.सी. डिब्बे छाँट रहे हैं
भारत की रेलों के रण में, नेता ही, बर्छी, भालें हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
नंगे भूखे अगडे़ पिछडे पैसेन्जर सबको ढोती है
बलात्कार में मध्यवर्ग की जोरू भिंच भिंचकर रोती है
बुलेट ट्रेन, सपनों में नंगे ,चांद सितारे देख रहे हैं
ट्रेनो के इन्जन की गर्मी में सब रोटी सेंक रहे हैं
अब तक जो भी जुडे रेल से, सबके माले पर माले हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
मंहगायी कम कैसे होगी जमाखोर कैसे पकडोगे
चन्दा देने वाले अपने चेलों को कैसे रगडोगे
लोकतन्त्र के मेरूदण्ड में ये ही कीडे डाल रहे हैं
शदियों से ये चाल,चरित्र ओर चेहरों को खंगाल रहे हैं
सत्ता में कोई भी बैठे, इनके गडबड घोटालें हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
आटा,चावल,शब्जी,दाले,नमक तेल और मिर्च मशाले
आलू.लहशुन,प्याज ने ही तो हरदम नंगे, भूखे पाले
सत्तर फीसदी नंगे, भूखों के मूंह पर रोटी डलवाते
हम को कोई फिक्र नही थी,फिर चाहे तुम भारत खाते
कवि ‘आग’ के छन्द हमेशा शोले भडकाने वाले हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
दश रूपये में पूडी, सब्जी हर स्टेशन में दिलवादेते
अच्छा पानी हर गरीब को स्टेशन में पिलवा देते
थर्डक्लास के वेटिंग रूमो में भी झाडू लगवा देते
जिन डिब्बों में फटी सीट है उनको थोडा सिलवा देते
थोडा सा चूना पुतवाते जंहा - जंहा धब्बे काले हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें हैं
आरक्षण मांगो तो वेटिंग, कम्प्यूटर भी बोल रहा है
टी.टी. सबकी औकातों को,ट्रेन के अन्दर तोल रहा है
मुंह मांगा पैसा फेंकोगे, तब जुगाड कुछ हो जाता है
मैं तो ये ही देख रहा हूं, ट्रेनो को टी. टी. खाता है
बाहर से सब श्वेताम्बर हैं भीतर सब पूरे काले हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
पूछ-ताछ की खिडकी खाली, बाबू बाहर घूम रहा है
टिकिट बाबू भी लगा जुगाड में,वेटिंग वाले ढूंढ रहा है
पैसों में आरक्षण सुविधा, अब दल्ले ही बांँट रहे हैं
एम.पी,एम.एल.ए. के कोटे, ए.सी. डिब्बे छाँट रहे हैं
भारत की रेलों के रण में, नेता ही, बर्छी, भालें हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
नंगे भूखे अगडे़ पिछडे पैसेन्जर सबको ढोती है
बलात्कार में मध्यवर्ग की जोरू भिंच भिंचकर रोती है
बुलेट ट्रेन, सपनों में नंगे ,चांद सितारे देख रहे हैं
ट्रेनो के इन्जन की गर्मी में सब रोटी सेंक रहे हैं
अब तक जो भी जुडे रेल से, सबके माले पर माले हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
मंहगायी कम कैसे होगी जमाखोर कैसे पकडोगे
चन्दा देने वाले अपने चेलों को कैसे रगडोगे
लोकतन्त्र के मेरूदण्ड में ये ही कीडे डाल रहे हैं
शदियों से ये चाल,चरित्र ओर चेहरों को खंगाल रहे हैं
सत्ता में कोई भी बैठे, इनके गडबड घोटालें हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
आटा,चावल,शब्जी,दाले,नमक तेल और मिर्च मशाले
आलू.लहशुन,प्याज ने ही तो हरदम नंगे, भूखे पाले
सत्तर फीसदी नंगे, भूखों के मूंह पर रोटी डलवाते
हम को कोई फिक्र नही थी,फिर चाहे तुम भारत खाते
कवि ‘आग’ के छन्द हमेशा शोले भडकाने वाले हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:
Post a Comment