Thursday, February 12, 2015

 दिल्ली की किल्ली
मरना   है   तो  पूर्ण - राज्य  का  दर्जा लेलो
मोदी  की  गोदी   में   बैठो   खुलकर   खेलो
राजा  बनकर  खुदी  भिखारी   बन  जाओगे
रोटी  भी  मोदी   के    टुकडो    की  खाओगे

अब तक जो भी  राज्य  बने  हैे  हालत देखी
पेट  भरा  जब   दिल्ली    ने   ही  रोटी फेंकी
सब  धनवानो  की  इच्छा   पूरी  हो  जायेगी
जो नंगी  जनता  साथ है  तेरेे   कंहा जायेगी

केन्द्र समर्पित  हो  करके  घर   तो बसवालो
जनता  के  जो - जो  वादे    है   उनको पालो
अलग खडे हो स्वाभिमान तब तक जिन्दा है
ये  स्वाधीनता,  पराधीनता    की   निन्दा हेै

बिजली,पानी,स्वास्थ,सुरक्षा,शिशू की शिक्षा
झोपड ,पट्टी,  टम-टम, गाडी, टेम्पू,रिक्शा
इतने में  ही  सब  खून, पसीना  बह जायेगा
स्वाभिमान सत्ता का, फिर  कब तक गायेगा

इस खण्ड-खण्ड  से  पूरा  भारत लुटा पडा हेै
हर पृथक  राज्य तो  चौराहे में आज खडा है
जब तक  दिल्ली  केन्द्र  संरक्षण में रहती हेै
ये विकाश  की  सरितायें  तब  तक बहती हैं

जो भाव मिले है उन भावों में  घाव ना डालो
जनमत की इच्छा से बस जनमत को पालो
शिक्षा,स्वास्थ सुरक्षा  पर ही ध्यान लगाओ
जितनी चादर  मिली  है उतने चरण बढाओ

अब  धीरे-धीरे  चलने  में  कुछ  हार  नही है
ये राजनीति है , पवन - व्योम संचार नही हेै
पृथक  राज्य  की  औकातो  को  देख रहा हूँ
कवि  आग  हूँ,  कुछ  चिन्गारी  फेक रहा हू।।
            राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                मो0 9897399815
     rajendrakikalam.blogspot.com

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