आत्माराम
आत्मा राम रंगे हाथों चोरी में पकडा गया
पुलिस द्वारा हथकडियों, बेडियों सेे जकडा गया
चारों तरफ थी भीड़ और पुलिस का साया
बडे़ धैर्य से आत्माराम जज के सामने आया
जज ने पुलिस से कहा बेडियाॅ खोलो
आत्माराम गीता पर हाथ रखो और बोलो
आत्माराम ने कहा सब कुछ सच बोलूॅंगा
सतयुग से आज तक की पूरी पोल खोलूॅंगा
एक छोटी सी चोरी में मुझे बेडियों से जकडा है
हर युग में बडे़-बडे़ उत्पात हुये उन्हे पकडा है?
एक देवता ने दूसरे देवता की लुगाई चुरायी
क्या वो चोरी नही थी, मेरे न्यायाधीश भाई
लुगाइयों पर तो देवताओं की नजरें रहती थी
हूकूमत क्यों मौन थी कुछ क्यों नही कहती थी
इन्दर गौतम की पत्नि को बर्बाद कर आया
आपने कौन सा बलात्कार का कानून लगाया
हिरण्यकष्यप तो प्रहलाद को सुधार रहा था
अपनी पूरी हूकूमत उसमे! उतार रहा था
नरसिंह ने कैसे उसे अपने हाथों से उसे फाडा
तब कहाॅं था वकील न्यायाधीशों का अखाडा
त्रेता में तो सूर्य - वंशियों ने हद्द कर दी
पूरी कानून की व्यवस्था ही रद्द कर दी
बेटों के कारण लावारिस बाप मर जाता है
बिना क्रिया-करम के पुरूषोत्तम जंगल जाता है
जंगल में निहत्ते श्रवण पर कैसे बाण दागा
गरीब ने लावारिसी में अपना प्राण त्यागा
राम ने भी सरे आम सोने का हिरन मारा
सलमान उसी केस में तो फंसा हेै बेचारा
लक्ष्मण ने तो सूपर्णखा की नाक ही उडा दी
सनातन के कानून की व्यवस्था ही सडा दी
राम ने कैसे बालि को छिप कर बाण मारा
उस समय कंहा था ये कानून का पिटारा
रावण ने तो अवधेश की सीता ही उठाली
घटना घटने के बाद सब देते रहे गाली
मेघनाथ ने भी तो लक्ष्मण को सरेआम मारा
हनुमान के सामने ही हुआ था ये काण्ड सारा
राम ने तो रावण का खानदान ही काट दिया
कानून तो कानून व्यवस्था को ही चाट दिया
पत्नि से ज्यादा धोबी पर विश्वास आया
घर पहुंचते ही माॅं सीता को जंगल दिखाया
आज के युग में अगर सीता घर से बाहर होती
मुआवजे के साथ राम को घर - घाट से खोती
भक्त ही गवाही देकर राम को जेल में डालता
आज राम को वि. हि .प . नही तिहाड़ पालता
हनुमान तो जिन्दगी भर राम की गुलामी में था
हिन्दुस्तान का सिपाही पूरी तरह सलामी में था
अपनी पूरी जवानी ही जी हजूरी में गवाॅंदी
इस धर्म - युद्ध में पूरी कौम ही भेंट चढादी
आज भी राम की चर्चा मे हनुमान खडा है
उसका वंस देश में रोटी को मुहताज पडा है
धार्मिक लोग शहर से बंदरों को जंगल भगाते हैं
लेकिन मंगलवार को हनुमान चालिसा गाते हैं
आज 80 प्रतिशत आदमी को सूगर का रोग है
हनुमान के लिये आज भी बूॅंदी का भोग है
भविष्य मे हनुमान को भी सूगर हाने वाली हेै
देश की जनता बाहर से सफेद भीतर से काली है
द्वापर में भी तो कृष्ण भगवान ने चोरी की थी
छूध , दही , मक्खन , मट्ठा बाॅंट के पी थी
कंस ने भी जीजा , बहन को जेल दिखाया
तब कौन सा वकील पेैरवी के लिये आया
कंस ने भी तो बच्चों को तडफा-तडफा के मारा
तब कॅंहा थी संविधान की ये 302 की धारा
कंस ने तो अपने बाप को भी जेल में डाला
ये भी तो द्वापर युग का इतिहास है काला
गोपाल ने जमुना में कालीनाग की सांस घोट दी
जीव संरक्षण वालों को कैसी करारी चोट दी
भगवान ने तो एक और स्कैण्डल दिखाया
अपनी बहन को ही अर्जून के साथ भगवाया
दुर्योधन ने अब तो सच्चायी की ही हद्द करदी
नटवरलाल की सारी योजना ही रद्द करदी
उसकी बात में तो कहानी का पूरा ही सूत्र था
सिद्व करना था कौन पाण्डू का असली पूत्र था
ताऊ को तो वैद्य ने फिजीकली अनफिट बताया
इन पाॅंच को हस्तिनापुर की धरती पे कौन लाया
इनसे सबसे ज्यादा दावेदारी तो आज करण में है
जो बदनाम हो कर भी ,आज मेरी शरण में हेै
इन पाॅचो आलावा विदुर भी तो ज्ञानवान था
जो व्यास जी का अंधेरे में दिया हुआ दान था
सच्चायी तो पाण्डु औेर धृतराष्ट्र की भी खलती है
क्यों कि ये नश्ल तो बाबा वेद व्यास से चलती हेै
और वेद व्यास भी तो सत्यवती का ही खून था
जो दादी और परासर की तरूणाई का मजमून था
सारा सारा वंश तो कायदे से हवा में चल रहा था
भीष्म पितामाह की हूकूमत थी तो पल रहा था
मुरलीधर तो पूरा इतिहास ढंग से जानता था
मजबूरी की रिस्तेदारी थी ,लेकिन मानता था
सरेआम कानून और खून पिटता जा रहा था
ताकत के बल पर समाज घिसटता जा रहा था
द्रोपदी की साडी सभा में सरे आम खिंच रही थी
योद्याओं के बीच में अबला कैसे भिंच रही थी
धर्मराज युधिष्ठिर भी औरत को जूॅए में हारता है
गिरधारी भी तो अनैतिकता को कैसे संवारता है
भाभी ने मजाक में अंधे को अधे का ही तो बोला
इस छोटी सी मजाक ने पूरा महाभारत झेला
एक द्रोपदी की हठ ने पूरा पूरे वंश को ही मरवाया
गोर्वधन गिरधारी को भी त्रियाहठ ही रास आया
बे-सिर पैर का महाभारत पूरे समाज को खा गया
लेकिन हमारे राजनीतिज्ञों को ये खेल भा गया
गीता ने तो जिन्दो को भी मुर्दा घोषित कर दिया
अर्जून की रग-रग में बदले का जूनून भर दिया
महोदय,इस कलियुग में कौन चोरी नही करता है
एक उदाहरण बताओ जो आत्मा से नही मरता है
राजनेता तो करोडों, अरबो की चोरी रोज करते हैं
हिन्दुस्तान में नही विदेशो में भी तिजारी भरते हैं
नेता ,अधिकारियों की सम्पत्ति की जाॅच करालो
रिस्ते नातेदारियों में भी इनके सारे खाते खंगालो
पता चलेगा हिन्दुस्तान किस तिजोरी में बन्द हेै
हम तो छोटे-मोटे हैं , राजनीति में बडी-बडी गन्द है
फिर बताना जज साहब चोरी कौन नही करता है
जर,जोरू,जमीन के पीछे, ये हिन्दुस्तान मरता है
जमीनोंऔर कमीनो के भाव दिन-रात बढ़ रहे हैॅ
अब तो हमारे योगी बाबा लोग भी यही कर रहे हैं
धर्म का झण्डा उठाओ, सरकार से लीज कटवालो
ट्रस्ट बनाओ और मिल बाॅंट के आपस में खालो
दवाइयाॅं ओैर आटा, दाल , चावल खुलकर बेचो
कालाधन चिल्लाओ और इज्जत से माल खेंचो
भ्रष्टाचारी, भ्रष्टाचार के खिलाप आवाज उठाते हैं
लवारिस, आवारागर्द भी इन्ही के पीछे आते है
फिर इन संगठनो का एक पागलखाना बनजाता है
जिन पागलो! का इलाज नही है वो इसमें आता है
सतयुग से आज तक यंहा व्यभिचार ही चलते हैं
और हमारे नेता लोग रोज कानून ही बदलते हैं
मन्दिर,मस्जिद,चर्च,मदरसा क्या आदमी बनाता है
हिन्दू,मुस्लिम, सिक्ख ,ईसाइ भी यंही का खाता है
ये हिन्दुस्तान भी तो एक एैतिहासिक चौक है
बे-वजह की पंगे - बाजी करना हमारा शौक है
आज लोग पहले से ज्यादा पढे़ लिखे हैं ज्ञानी है
फिर भी पागलपन देखो , रोज की कहानी है
अगर नेता और धर्म गुरूओं को आज हाथ जोड़दो
धर्म और समाज से इनका नाता दूर-दूर तक तोड़दो
ये सम्प्रदायिक आदमी आज ही धार्मिक बनजायेगा
ये हिन्दुस्तान पहले की तरह पटरी पर आजायेगा
धर्म,मजहब ने तो आदमी - आदमी को बाॅंट दिया
इसी शदी में देश को कितने टुकडों में काट दिया
मैं पूछता हूॅं कानून के रक्षक और भक्षक कौन हैं
आत्माराम के तर्क पर वकील ,न्यायाधीश मौन हैं।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
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