पद,मद,हद,और कद की नजाकत
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
कौम ,कबीले धर्म मजहब हैं चीन नही जापान नही है
शिक्षा दीक्षा और तितिक्षा शहर गांव में भिन्न.भिन्न है
संस्कारो की छोटी-छोटी नदियों से सागर भी खिन्न है
निजी स्वार्थ में जीने मरने वालो में स्वाभिमान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
कोष.कोष भांषा के झगडे कोष- कोष पिछडे और अगडे
विधान सभा हो या संसद हो नेताओं के अपने रगडे
एक देश को छप्पन टुकडों में मिलकर तुम बांट रहे हो
कूडे करकट के ढेरों में भारत मां को छांट रहे हो
इतिहासों में जीने वालो का दुनिया में मान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
प्रतिष्प्रधा की जीवन रेखा हम सब मिलकर लांघ रहे हैं
जंहा.जंहा भी हम जाते हैं भिक्षा ही तो मांग रहे हैं
देने वाला सोच विचार कर खप्पर में कुछ डाल रहा है
दानी कहने वाला मतलब से नंगो को पाल रहा है
हम मुशीबतों को न्यौता देकर कैसे सीना तान रहे है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
बिना स्वार्थ के आज जगत में कौन कंहा बाते करता है
अहशानो के दबे बोझ से शत्रु मित्र घातें करता है
बच्चा. बच्चा कर्जे में है हमको ये अहसास नही है
हम गिर्वी है इसमे नेताओ की रूची खास नही है
कर्जा खाकर जीवन जीने में भारत की शान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
जापान गये, जापानी से स्वाभिमान कुछ सीखा होता
सख्तायी से देश चलाते ये , अनुभव कुछ तीखा होता
राजनीति के सभी नमूनो को अनुशाशन पाठ पढाते
एक ही सीढी है विकाश की उस मंजिल से आगे जाते
छोटे - छोटे दलों की हरकत ये राष्ट्र गुणगान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
कौन भ्रष्ट है कंहा भ्रष्ट हेै राजनीति सब जान रही है
सत्युग ,द्वापर ,त्रेता ,कलियुग चोरों की पहचान रही है
धर्म - कर्म में जीने वाले ही तो माया लूट रहे है
भारत की बन्जर धरती में नये.नये अंकुर फूट रहे हैं
जिनकी ये बुनियादी मंजिल उनका भी सम्मान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
वक्त मिला है पूरे देश की आशा तुम पर टिकी हुयी है
मुक्त करादो वशुन्धरा को जो कर्जे में बिकी हुयी हेै
स्वाभिमान फिर से लौटाओ जो हमने अबतक खोया है
आंशू पोंछो उन गरीब के राजनीति से जो रोया है
एक काफिला हो हर मजहब ये तुगलक फरमान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
झोपड पट्टी पक्की होगी, घर-घर में पन चक्की होगी
सत्ता,धक्का मुक्की होगी, दिल्ली, हक्की-बक्की होगी
घर - घर चेले घूम रहे हैं, चरण सभी के चूम रहे हैं
सारे अफलातून रहे हैं, सब डाकू मासूम रहे हैं
मोदीजी,अब तुम पीएम.हो,ये, पद, गरिमा शान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
गली-गली में अब ना घूमो,दल का झणडा ले मत झूमो
ये सब भारत के बच्चे हैं, गले लगाकर सबको चूमो
झूठे वादे अब मत गाओ, झण्डे-डण्डे मत लहराओ
जनसंख्या पर रोक लगाओ,कुछ चेलों को भीसमझाओ
सात लाख का सूट पहनना, भारत की पहचान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
सभी राष्ट्र नतमस्तक होंगे अपने घर की मजबूती से
शान्त स्वरों के माहौलो में डर लगता है इस तूंंती से
हिन्दु मुस्लिम सिक्ख इसाई बस केवल भारतवाशी हो
मन्दिर, मस्जिद ,गुरूद्वारा , चर्च यंहा मथुरा काशी हो
कवि आग की चिन्गारी में आशा है ,अनुमान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आगद्ध
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
कौम ,कबीले धर्म मजहब हैं चीन नही जापान नही है
शिक्षा दीक्षा और तितिक्षा शहर गांव में भिन्न.भिन्न है
संस्कारो की छोटी-छोटी नदियों से सागर भी खिन्न है
निजी स्वार्थ में जीने मरने वालो में स्वाभिमान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
कोष.कोष भांषा के झगडे कोष- कोष पिछडे और अगडे
विधान सभा हो या संसद हो नेताओं के अपने रगडे
एक देश को छप्पन टुकडों में मिलकर तुम बांट रहे हो
कूडे करकट के ढेरों में भारत मां को छांट रहे हो
इतिहासों में जीने वालो का दुनिया में मान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
प्रतिष्प्रधा की जीवन रेखा हम सब मिलकर लांघ रहे हैं
जंहा.जंहा भी हम जाते हैं भिक्षा ही तो मांग रहे हैं
देने वाला सोच विचार कर खप्पर में कुछ डाल रहा है
दानी कहने वाला मतलब से नंगो को पाल रहा है
हम मुशीबतों को न्यौता देकर कैसे सीना तान रहे है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
बिना स्वार्थ के आज जगत में कौन कंहा बाते करता है
अहशानो के दबे बोझ से शत्रु मित्र घातें करता है
बच्चा. बच्चा कर्जे में है हमको ये अहसास नही है
हम गिर्वी है इसमे नेताओ की रूची खास नही है
कर्जा खाकर जीवन जीने में भारत की शान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
जापान गये, जापानी से स्वाभिमान कुछ सीखा होता
सख्तायी से देश चलाते ये , अनुभव कुछ तीखा होता
राजनीति के सभी नमूनो को अनुशाशन पाठ पढाते
एक ही सीढी है विकाश की उस मंजिल से आगे जाते
छोटे - छोटे दलों की हरकत ये राष्ट्र गुणगान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
कौन भ्रष्ट है कंहा भ्रष्ट हेै राजनीति सब जान रही है
सत्युग ,द्वापर ,त्रेता ,कलियुग चोरों की पहचान रही है
धर्म - कर्म में जीने वाले ही तो माया लूट रहे है
भारत की बन्जर धरती में नये.नये अंकुर फूट रहे हैं
जिनकी ये बुनियादी मंजिल उनका भी सम्मान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
वक्त मिला है पूरे देश की आशा तुम पर टिकी हुयी है
मुक्त करादो वशुन्धरा को जो कर्जे में बिकी हुयी हेै
स्वाभिमान फिर से लौटाओ जो हमने अबतक खोया है
आंशू पोंछो उन गरीब के राजनीति से जो रोया है
एक काफिला हो हर मजहब ये तुगलक फरमान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
झोपड पट्टी पक्की होगी, घर-घर में पन चक्की होगी
सत्ता,धक्का मुक्की होगी, दिल्ली, हक्की-बक्की होगी
घर - घर चेले घूम रहे हैं, चरण सभी के चूम रहे हैं
सारे अफलातून रहे हैं, सब डाकू मासूम रहे हैं
मोदीजी,अब तुम पीएम.हो,ये, पद, गरिमा शान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
गली-गली में अब ना घूमो,दल का झणडा ले मत झूमो
ये सब भारत के बच्चे हैं, गले लगाकर सबको चूमो
झूठे वादे अब मत गाओ, झण्डे-डण्डे मत लहराओ
जनसंख्या पर रोक लगाओ,कुछ चेलों को भीसमझाओ
सात लाख का सूट पहनना, भारत की पहचान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है
सभी राष्ट्र नतमस्तक होंगे अपने घर की मजबूती से
शान्त स्वरों के माहौलो में डर लगता है इस तूंंती से
हिन्दु मुस्लिम सिक्ख इसाई बस केवल भारतवाशी हो
मन्दिर, मस्जिद ,गुरूद्वारा , चर्च यंहा मथुरा काशी हो
कवि आग की चिन्गारी में आशा है ,अनुमान नही है
मोदी जी अब ये भारत है अब वो हिन्दुस्तान नही है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आगद्ध
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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