भारत का महाभारत
राजनीति के हर विरोध को कौरव सेना क्यों कहते हैं
राजनीति के चक्रव्यूह में अभिमन्यु ही क्यों रहते हैं
अर्जून के गाण्डीव धनुष क्यों पुत्रमोह को ही सहते हेै
कर्ण,भीष्म और द्रोण हमेशा, अपवादो में क्यो बहते हैं
वंहा धर्म - युद्व, यंहा कर्म - युद्व, दोनो में हेरा फेरी है
वंहा निर्णय जल्दी होता है ,यंंहा हर निर्णय में देरी है
वहा हिंसक दण्ड का भागी था,यंहा खादी नैतिकवादी हेै
यंहा राजनीति ही वैश्या है, जो नगर-वधू सहजादी है
वंहा द्रोपदी पाण्डव सेना को प्रण से रण में उकसाती है
यंहा आज लंगोटी नेता के गुण-गान सभा में गाती है
वंहा अर्जुन किन्नर बनता है ,अपनी ही जान बचाने को
यंहा नेता किन्नर बनता हेै,छल,कपट से रोटी खाने को
वंहा शकुनि चौपड के पासे बस,खेल रहा प्रतिशोधों से
यंहा सतरंज की चालें भी चलती विरोध गतिरोधों से
वंहा लक्षागृह भी बनता है शत्रु अस्तित्व मिटाने को
यंहा आग लगाते हैं नेता भारत में युध्द जुटाने को
वंहा भीष्म प्रतिज्ञा करता है,सर- सैया पर सो जाता हेै
यंहा नेता करता धरता हेै,जो खसम स्वंय बन जाता हेै
वंहा धृतराष्ट्र को संजय ही ,रण का सब हाल सुनाता है
यंहा सारे संजय अन्धे है, सब धृतराष्ट्र के भ्राता हैं
यंहा राजनीति में नेता के भगवान उदाहरण बनते है
वंहा कुरूक्षेत्र में गिरधारी, सबके भव-तारण बनते है
यंहा मन्दिर,मस्जिद के झगडे, अल्लाह, ईश्वर ढोते हेै
वंहा आत्मग्लानि से मानव भी जन्मो तक ही रोते है
ये भारत की महाभारत की उपमा हैे आज जमाने में
हर शख्स यंहा पर उत्सुक है,भारत को पूरा खाने में
गीता,कूरान और रामायण से ,राजनीति क्यों होती है
कवि आग की कविताएं क्यों सत्यवती सी रोती है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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