Wednesday, February 18, 2015


                कोट-पेन्ट का टैन्ट
मोदी  की  टोपी से महगी  गाँधी जी  की  एक लंगोटी
गंगा  मैया   तेरे  नाम   से   सेंक  रहे  हैं , नेता रोटी
शब्दों   के   सौदागर   देखो,  फेंक  रहे  हैं  कैसे गोटी
पागल बोली  बोल  रहे  हैं,काले  धन  की माया मोटी

कच्छे  बेचो, लच्छे  बेचो,शब्द  छाँट   कर अच्छे बेचो
सरितायें  सूखी  हैं सारी,मगर मच्छ और मच्छे बेचो
शहर गाँव भी बिका  हुआ  है,बचे-खुचे  परखच्चे बेचो
हे शब्दों  के  सौदागर अब  शब्दो  के  भी  लच्छे बेचो

टोपी बेचो घडियाँ  बेचो,अब सुन्दर  फुलझडियाँ बेचो
संविधान की  कोपी  बेचो, गुप्त  बनाओ फिलोपी बेचो
राजनीति  की  काली, पीली, जोकर शक्ले  भद्दी बेचो
रद्दी  बेचो,  सद्दी  बेचो, अब  पी. एम. की  गद्दी  बेचो

कोट  पैन्ट  और   टाई  बेचो,बची है  भारत माई बेचो
दाडी,मूँछ  की  डाई   बेचो, राष्ट्र - भक्त   परछायी बेचो
लोकसभा   के   नाई  बेचो, भाषण  षब्द   हवाई बेचो
काले  धनी   जंवाई  बेचो, मोदी   तुम  मंहगायी बेचो

आरएसएस  चुपचाप  खडी हेै, बीजेपी. परवान चढी हैे
सभी समस्या गले पडी हेै,शब्द बाण  की लगी झडी है
ये  जादू  की  कौन छडी है, स्मृति,सुषमा कौन बडी है
अमितशाह की अलग तडी हेै,ये मोदी की सभी कडी है

भारत माता  तेरी  आड  मैं, नेता क्या-क्या बेच रहे हैं
मामा शकुनि, कंस, दूशासन, सारे इज्जत  खैंच रहे हैं
चाय,पकोडी की  किमत  को, स्वर्णाभूषण तोल रहा है
कपडों की कीमत को भारत, हर चैनल पर बोल रहा है

लाल बहादुर  की  धोती  का,राजनीति में मोल नही है
आघा भारत नंगा - भूखा,उनका कोई  भी तोल नही है
मोदी कच्छा  मुझे भी दे दो, मेरा जीवन सुधर जायेगा
इस कच्छे से कवि आग भी अपनी कविता छपवायेगा।।
                   राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                            9897399815
              rajendrakikalam.blogspot.com

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