अब ये भी करना होगा
एक बार तो हर नंगे के दिन आते हैं
ये पजातन्त्र के बोट - बैक ही बतलाते हेैं
आई.ए.एस,आई. पी.एस. अब इन्साफ करेगें
यही पखाना अब नगो का साफ करेगें
कपडे खोल के हर नंगा अब तैयारी में है
इस बोट बैंक के खातिर नेता लाचारी में है
हाथ मे लोटा, डिब्बा लेकर करो सफाई
अरविन्द केजरी, माकन हो या किरण माई
अब सारे सांसद, मंत्री, संत्री गस्ती में हेैं
बिजली, पानी, सीवर लाईन बस्ती में हैं
अब पक्के - पक्के भवन बनेगे, हर नंगे के
नये - नये नुक्ते निकलेगें अब दगे के
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई आओ भाई
सब घूम रहे हैं हाथ मे उस्तरा लेकर नाई
दिल्ली में तो राम - नाम की लुट पडी है
झुग्गी, झोपड, पट्टी सब तैयार खडी हेै
अब टी. वी. चैनल सारे मस्ती लूट रहे हैं
राजनीति की दवा, दस्त से कूट रहे है
नये - नये तोतो से चैनल खेल रहा है
दिल्ली तो अब सांडो को ही झेल रहा है
अब ये चुनाव भी मुंगेरी के ही सपने है
स्वप्न दोष के सभी शि खण्डी भी अपने है
इनके बाप का क्या जाता है, बोल रहे हेैं
इस बोट - बैंक से हर नंगे को तोल रहे है
दुर्भाग्य देश का,पी.एम भी सडकों पर आया
स्वप्न -दोष के नंगो को फिर स्वप्न दिखाया
काले - धन के हमने भी खाते खुलवाये
सात लाख का कोट - पैन्ट देखा हरसाये
लोकतन्त्र की बुनियादो में नंगे पत्थर
आलीशान भवन में देखो खादी, खद्दर
क्या भूखे - नंगो से कोई, इन्साफ करेगा
क्या कवि आग का छन्द पखाना साफ करेगा।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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