Thursday, September 3, 2015

गोपाल की चौपाल
जै कनैह्या लाल की, हाथी घोडा पालकी
कांग्रेस और बी.जे.पी के भ्रष्टाचारी हाल की
टाटा,बिडला, डालमिया और अम्बानी के माल की
चोर-चोर की चौकीदारी, खाल निकाले बाल की
जै हो खादी वाले डाकू दरिया - दिली दलाल की
जै कनैह्या लाल की, हाथी घोडा पालकी

कारागृह में जन्म लिया ,पर अपराधों को दूर किया
तूने शैशवता से सबके जीवन को भरपूर किया
बडे-बडे महापापी मारे, धर्म धरा में लाने को
तेरी रास में सभी देवता लालाहित थे आने को
हे मुरलीधर देखो, हालत आटा, चावल ,दाल की
जै कनैह्या लाल की, हाथी घोडा पालकी
हे गिरधारी आज देश में प्याज लाज को लूट रहा
जमाखोर दामाद सियासी, माल श्वांस से घूंट रहा
छूध,दही में आज यूरिया खुलकर रास रचाता हेै
हर मन्दिर में नकली गो-रस आज बिहारी खाता हेै
जन्म-अष्टमी मजबूरी है भारत में हर साल की
जै कनैह्या लाल की, हाथी घोडा पालकी
आज देश में बडे - बडे महिसासुर मस्ती काट रहे
तूने माखन ,मिश्री बांटा, ये भारत को बांट रहे
न्यायालय में तेरी गीता को अपराधी बाँच रहे
तेरी मुरली लेकर आशा बापू घर -घर नाच रहे
काम - वाशना में कीमत है नारी के कंकाल की
जै कनैह्या लाल की, हाथी घोडा पालकी
कल फिर तेरा जन्म मनेगा,मन्दिर के चौबारों में
घूम रहा है पूरा भारत काम-देव सा डारों में
हे गिरधारी द्वापर वाली, लीला फिर से दिखलाओ
गदा, चक्र लेकर भारत की संसद में तो आजाओ
कंस, दुशासन, जरासंध ,सब बैठे कलियुग कालकि
जै कनैह्या लाल की, हाथी घोडा पालकी

तेरी गैय्या आज देश में गन्द सडक का खाती है
गौ - माता भी, गौ - अष्टमी को सुनकर शर्माती है
बडे-बडे गौ-पाल देश में, गऊ की गाथा गाते हैं
आज देश में साण्ड सडक पर लावारिस मर जाते हैं
जय हो चन्दा खाने वाले, गऊ सेवक गोपाल की
जै कनैह्या लाल की, हाथी घोडा पालकी
क्यों होते होते पैदा भगवन भूखे नंगे देशों में
करते है दिन रात लफंगे दंगे तेरे भेषों में
बन जाती है परम्परायें, भगवन तेरे नामो से
छिड जाती हेै जंग यंहा पर पूजा के पैगामो से
कवि आग की सुनकर गिरधर झलक दिखाओ काल की
जै कनैह्या लाल की, हाथी घोडा पालकी।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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