Wednesday, September 23, 2015

जवानी
दूध के उफान से मावा निकलता जायेगा
इस धधकती कौम से लावा पिघलता जायेगा
कौन देता है हवा इस यौन के तूफान को
कुर्बान करना छोड़ दो अब राष्ट्र के सम्मान को

फूल बनने से भी पहले क्यों कलि को तोडेते हो
भूकम्प को ज्वालामुखी की राह में क्यों मोडते हो
ये फट गया तो आग की लौ से जमीं जल जायेगी
फिर ना ये पीडी जवानी को पुनः दोहरायेगी
तुम तो भटके थे ना भटकाओ जवानी देश की
कू-चक्र से भी ना मिटाओ ये जवानी देश की
आतंक के पथ पर ना लाओ ये जवानी देश की
बे- मौत मरने से बचाओ ये जवानी देश की

जोश हो तो बोष, शेखर औेर भगत अपनाइये
उगने से पहले अंकुरो को इस तरह ना खाइये
सत्ता, सियासत रोंदती है क्यों सनातन की धरा
क्यों बनाते हो जवानी से जहाॅं को मकबरा

इस तरह यौवन वतन का अब ना लडने दीजिये
ये धरोहर राष्ट्र की इनको ना सढने दीजिये
राजनीति अब युवक पर हाथ रखना छोड दे
सल्तनत भी इस तरह सजना संवरना छोड दे

अब जवानी इस सियासी चाल को भी भांपती है
इस भ्रष्टता की राजनीति को जवानी नापती है
जो लुट गया, वो लुट गया, अब ना लुटने पायेगा
ये आग का लावा, विरासत से सियासत खायेगा।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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