Thursday, September 17, 2015

बिहार का चुनावी गीत
मैं बिहार हूँ
मैं बिहार हूँ चार दशक से लालू के संग खेल रहा हूँ
मैं बिहार हूँ तीन दशक से पासवान को झेल रहा हूँ
मैं बिहार हूँ माझी को भी गिरते - पढते उठा रहा हूँ
मैं बिहार हूँ,सात दशक से अपनी इज्जत लुटा रहा हूँ

मै बिहार हूँ बोद्व - धर्म को गया धाम में पनपाता हूँ
मैं बिहार हूँ , महावीर को पूरा भारत दिखलाता हूँ
मैं बिहार हूँ,अखण्ड-राष्ट्र को चाण्क्यो से जोड चुका हूँ
मैं बिहार हूँ चन्द्रगुप्त से, राष्ट्र - धर्म को मोड चुका हूूूूँ

मैं बिहार हूँ घनानन्द के आतंको को देख चुका हूँ
मैं बिहार हूँ खुद अशोक के आगे घुटने टेक चुका हूँ
मैं बिहार हूँ मेरी शिक्षा का लोहा जग मान रहा था
मैं बिहार हूँ, चक्रवर्ती सम्राट मुझे पहचान रहा था

मैं वही बिहार हूँ,रोजी,रोटी को दरदर मोहताज खडा हूँ
मैं वही बिहार हूँ,रातनीति के आगे अब लाचार खडा हूँ
मैं वही बिहार हूँ, नीलामी सब चैराहो पर बोल रहे हैं
मैं वही बिहार हूँ,जिसको नेता अपने ढंग से तोल रहे हैं

मैं बिहार हूँ मुझको जंगल राज सियासी बोल रहे हेैं
मैं बिहार हूँ मुझ पर नेता सभी खजाने खोल रहे हैं
मैं बिहार हूँ मुझको सारे जुमलो से ही पाल रहे हैं
मैं बिहार हूँ कौम कबीलों से मुझको खंगाल रहे हैं

मैं बिहार हूँ मेरे कारण, पी. एम. भी मजबूर खडा है
मैं बिहार हूँ मेरे कारण हर मजहब में अलग धडा है
मैं बिहार हूँ पूरी संसद मेरे उपर घूम रही है
मैं बिहार हूँ आज सियासत चरण कमल भी चूम रही है

मैं बिहार हूँ हर चैनल के पैनल मुझको भांप रहे हैं
मैं बिहार हूँ मेरी कीमत अपने ढंग से आंक रहे हैं
मैं बिहार हूँ, दीन - हीन हूँ आज सियासी मीत बना हूँ
मैं बिहार हूँ कवि आग की कविताओं का गीत बना हूँ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:

Post a Comment