डेंगू
मंहगायी छाती में बैठी, अब डेंगू को झेल रहे हैं
मक्खी,मच्छर,खटमल,पिस्सू हर गरीब से खेल रहे हैं
ये मच्छर भी मध्य - वर्ग और नंगे - भूखे ढूंढ रहे हैं
अपने ढंग से हर मरीज को सभी चिकित्सक मूंड रहे हैं
राजनीति के बोट - बैंक से ,हास्पिटल भी भरे पडे हैं
सत्ता और सियासी मच्छर सब बिहार में मरे पडे हैं
दुर्भागय है, डेंगू मच्छर नेताओं को छोड रहा हैं
नंगा - भूखा जंहा देखा, उसी के पीछे दौड रहा हैं
हर साल की महामारी हैे,नेताओं को खबर नही है
सीएम.डीएम.मस्ती में है,पी.एम.को भी सबर नही है
सभी रोग के उपचारों का भाषण में अम्बार लगा है
इस जोकर के नाटक देखो,लगता है बस,यही सगा है
गली,मुहल्ले, झोपड, पट्टी में नेता जी जाकर देखो
जनता से क्या लेना-देना, शब्द प्यार के कुछ तो फेंको
पर नेता को डर लगता है छुआ-छूत की बिमारी से
बोटों का परहेज नही है राजनीति की इस क्यारी से
छोटे बच्चे बिलख रहे है हास्पिटल के गलियारों में
खून टैस्ट की लूट मची है, व्यवसायी चोरों-जारों में
दवा भी नकली,दो नम्बर की बेच रहे हैं बाजारों में
मजबूरी में फंसी पडी है जनता इन अत्याचारों में
हे बे-शर्मो कुछ तो सोचो, इस गरीब की मजबूरी का
मुझे बताओ क्या कारण है ,दीन-दुखी से इस दूरी का
जिस राष्ट्र में महामारी से लावारिस जनता मरती है
कवि आग,वो भू-मण्डल में दानवता की ही धरती है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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