Friday, September 25, 2015

चेतावनी
प्रजातन्त्र अब खेल रहा है राजतन्त्र के हाथों में
विध्वंश वंश की परम्परा का कब्जा देख अनाथों में
अंगले,कंगले बैठ गये हैं लोक-तन्त्र सिंहासन में
पहले राजा शासन में थे ,अब मतंग हैं शासन में

चरित्रवान राजा थे,अब तो चरित्रहीन हैं खादी में
मालिक जनता की गिनती भी होती है फरियादी में
पढे़ लिखे मुर्दे भी ,मुर्दों की भीडों में खो जाते हैं
मरघट कब्रिस्तान सियासी गीत शवों का ही गाते हैं

लडके, लडकी ,नाती, पोते, बहुवें देख सियासत में
ये भारत का प्रजातन्त्र है ,सबको मिला विरासत में
डेढ़ अरब की जनता मालिक हिन्दूस्तानी खसरे में
भारत माॅं की शक्ल देख ,लो संविधान के भसरे में

पूरा कुडमा राजनीति की सौगातों को गाता है
प्रजा-तन्त्र की परम्परा में गाॅंधी साथ निभाता है
पग-चिह्नो पर चलने वाले भी नश्लों को लाते हैं
गुणगान हमेशा पढे लिखे, ये मुर्दे हमें सुनाते हैं

देश के टुकडे़ - टुकडे़ होना राजतन्त्र को न्योता है
अखंड राष्ट्र के खंड - खंड से नालायक खुश होता है
राजनीति के ये मंसूबे में छोटे - छोटे सूबो में
भारत माता फंसी पडी है हक में और हकूबों में
हिन्दु, मुस्लिम,सिक्ख, ईसाइ आरक्षण में फंसे हुये
अगडे, पिछडे, कौम, कबीलों में नेता सब धंसे हुये
धर्म,मजहब के झगडों का भी खून सडक में बहता हैं
राष्ट्र लूटने वाला मां को भारत माता कहता है
प्रत्यक्ष रूप से प्रजातन्त्र में राजतन्त्र को देख रहा हूॅं
चितन,मंथन के शब्दो को कुछ मुर्दो पर फेंक रहा हॅॅूं
संविधान घर को खोता है कब तक इसको ढोओगे
आग लगाकर भारत में क्या राज-तन्त्र को बोओगे!!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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