Wednesday, September 9, 2015

मैं बिहार हूँ
मैं बिहार हूँ इस भारत में बुनियादें ही खोद रहा हूँ
मैं बिहार हूँ इस भारत की खेती, बाडी जोत रहा हूँ
मजदूरी से मजबूरी से मैं जीवन यापन करता हूँ
जीवन में भी निम्न-वर्ग से जीवन का मापन करता हूँ
राजनीति के जुमले को ही मैं बिहार में नौत रहा हूँ
मैं बिहार हूँ इस भारत में बुनियादे ही खोद रहा हूँ

मैं बिहार हूँ इस भारत के गली, मुहल्ले में मिलता हूँ
मैं बिहार हूँ बन्जर धरती में भी हंस-हंस कर खिलता हूँ
मैं बिहार हूँ आज वतन का वजन पीठ पर ही ढोता हूँ
मैं बिहार हूँ आदर्शों के इतिहासो से ही खोता हूँ
राजनीति के महापात्र को चौराहो में गोद रहा हूँ
मैं बिहार हूँ इस भारत में बुनियादे ही खोद रहा हू

मैं बिहार हूँ मेरे कारण पी. एम. सडके छान र हे हैं
मैं बिहार हूँ मुझको पी. एम. असली भारत मान रहे हैं
मैं बिहार हूँ मेरे उपर धन, वर्षा बौछार पडी है
मै बिहार हूँ मेरी जनता लावारिस बेकार खडी है
मैं बिहार हूँ इस भारत का इतिहासों में शोध रहा हूँ
मैं बिहार हूँ इस भारत में बुनियादे ही खोद रहा हूँ

मैं भारत में चन्द्रगुप्त और चाणक्यों का काल रहा हूँ
मैं भारत के स्वाभिमान का इस दुनियां में भाल रहा हूँ
मैं अशोक का रण-कौशल हूँ,रण में हिंसा त्याग चुका हूँ
मैं बुद्व हूँ, गया - बोद्व के बोधी - वृछ से जाग चुका हूँ
सबको बोध दिलाकर अब तक,दीन-हीन गतिरोध रहा हूँ
मैं बिहार हूँ इस भारत में बुनियादे ही खोद रहा हूँ

आज बिहर को राजनीति की ताकत मिलकर भांप रही है
आज बिहार के जनमत से भारत की सत्ता कांप रही है
वाणी-भूषण, बुध्दि-बल्लभ सडकों पर सर पटक रहे हैं
बडे-बडे धन, वैभव शाली, लावारिस से भटक रहे हैं
छल,कपटी,व्यभिचारों का मैं,शिदयों से प्रतिरोध रहा हूँ
मैं बिहार हूँ इस भारत में बुनियादे ही खोद रहा हूँ

आज सियासत से बिहार क्यों धूल सडक की चाट रहा है
आज बिहरी अगडे - पिछडे, कौम, कबीले बाँट रहा हेै
आज बिहारी सत्ता के सर्कस में जोकर खेल र हा है
आज बिहारी दंश, अंश,विध्वंश सियासि झेल रहा है
कवि आग की परिभांषा में परंवीर प्रमोद रहा हूँ
मैं बिहार हूँ इस भारत में बुनियादे ही खोद रहा हूँ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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