Saturday, September 19, 2015

                 नेता और कुत्ता
नेता  कुत्ता  पाल  रहा  है ,खींच  देश  की  खाल  रहा है
कुत्ता  फिर  भी   वफादार   है,  नेता   कितना  गद्दार है
घर  की   चौकीदारी   पूरी , फेंको   टुकडा   करे   हजूरी
कैसा कारण देश पतन का,  नेता  चौकीदार  वतन का
स्वामि भक्त तोआज श्वान है,नेताओं पर मेहर बान है
भ्रष्ट भाव की रोटी खाता ,फिर  भी  वफादार कहलाता
नेता अपनों  को  भाता  है , कुत्ता  अपनों  को  खाता है
प्यार करो तो मुंह चाटता, नेता  के  मुंह  लगो काटता
कुर्सि  में  भी  कु  आता  है , कु  से   कुत्ता  कहलाता है
कू कैसा अपमानित अक्षर,क्यों ना  कुत्ता हो कुर्सि पर
राजनीति रंजिस होती है, सतत्  घृणित् बीज बोती है
हर खटके में  भौंक  रहा  है , नेता  झटके  छोंक रहा है
कुत्ते की तो  काम  वाशना   ऋतु  मास  में  ही  होती है
राजनीति  की  विषय  वासना  हर  चौराहे  पर रोती है
राजनीति  में  डाके  देखो  देश   मौन    है  झेल  रहा हैं
माल सलामत पडा हुआ है कुत्ता  घर  में  खेल  रहा है
कुत्तों का परिवार  नही  है,  राजनीति  की  रार  नही है
गली,मुहल्लों के झगडे हैं,  सरहद  की  तकरार नही है
हिन्दु,मुस्लिम,सी कौमौ के,मजहब  जैसे रोष नही है
कुत्तों  मेंं  भी  उँच - नीच  है, आरक्षण  के  दोष  नही हैं
फौज,पुलिस और सी.बी.आई.भी तो  कुत्ते  पाल रहे है
आतंकी  और  चोर, उचक्कों  को  कुत्ते   खंगाल  रहे हैं
नेताओं  पर  राष्ट्र - सुरक्षा  का  कुछ  विस्वास  नही है
कुत्तों  का  भी  राजनीति  से , लेना-देना  खास नही है
कुत्ता हर नेता के घर है ,फिर भी दिल  में भरा जहर है
शिक्षा वफादार  की  पाओ,  नेता व फादार  बन जाओ 
टुकडे दो रोटी के खाता , मरते दम तक साथ निभाता
कवि आग से  शिक्षा  पाओ ,राजनीति  में  कुत्ते लाओ।।
                 राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                           9897399815
            rajendrakikalam.blogspot.com

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