मैं भगत सिह हूँ
मैं भगत सिह हूँ मैंने अंग्रेजो की हिंसा को झेला हेै
जलियां वाला काण्ड देख कर, महाकाल से भी खेला हेै
राजगूरू, सुख देव सिंह को फाँसी पर लटके देखा है
लाला पर आंतक दंश की खींची हुयी दिल पर रेखा है
मैंने गाँधी के चरणो को आजादी में हिलते देखा
नर्म दलो को अंग्रेजो के आगे खूब फिसलते देखा
बिसमिल को काकोरी काण्डो में फासी में झूलते देखा
सावरकर को अंग्रेजो के आतंको से धुलते देखा
चन्द्र शेखर के साथ मिला,नौजवान सभा की तैयारी में
स्वाभिमान को हमने देखा,सूभाष चन्द्र की तकरारी मे
गर्मदलो में गर्म खून था, भारत माँ की आजादी का
नर्मदलों का पथ - प्रदर्शन , राजनीति का परमादी का
आजादी को देने वालो की भारत में बात नही है
भगत सिंह,शेखर ,सूभाष, क्या ये भारत की जात नही है
इनके रण कौशल को सारी दुनिया अब भी मान रही हेै
बुनियादों के इन पत्थरो से भारत की पहचान रही है
क्यों करते हो याद उन्हे तुम,खुलकर बोल नही सकते हो
क्या कीमत हैउस शहीद की जिसको तोल नही सकते हो
क्यों करते हो ऐसा नाटक अपमानो के एहशानो से
क्या मतलब है राजनीति का भारत के इन परवानो से
दुख होता हेै जिनके कारण अब तक हम सब जिन्दा हेै
हम जेसे नालायक पुत्रों से भारत क्यों शर्मिन्दा हेै
अब भी थोडी इज्जत हो तो ढूंढो उन अवशेषों को
हृदय सेे सब करो नमन अब परं राष्ट्र के भेषों काे
भगत,सूभाष,बिसमिल, शेखर को, मुर्दे कब तक ढोयेगे
अब भारत की मर्यादा के मर्मों को कब तक खोयेंगे
बस,दबी हुयी चिन्गारी से मैं राष्ट्र - धर्म को गाता हूँ
मैं कवि आग हूं, आग राष्ट्र की शब्दों से सुलगाता हूँ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:
Post a Comment