आजादी की भूल
हम सूभाष की भांषा के भारत वाशी हैं
मेरा हिन्दुस्तान मेरा मथुरा काशी है
आजादी के चक्रव्यूह को रचने वाला
आजाद हिन्द का बोष कहां है वो मतवाला
तूने जिन्दे राष्ट्र - भक्त की फौज बनायी
तेरे कारण अंग्रेजों नें मुंह की खायी
दुर्भाग्य देश का मुर्दों के मुंह पर निन्दा है
सूभाष भगत तो आज भी भारत में जिन्दा है
क्यों आज राष्ट्र में डाकू झण्डा फहराते हैं
क्यों छंटे - छटाये गुण्डे मंचो पर आते हैं
खादी कुर्ता केवल भाषण झाड रहा है
राष्ट्र भक्ति को कबर में जिन्दा गाढ रहा है
प्रजातन्त्र की कमी से भारत लुट जायेगा
नोट - बोट की नीति से पागल आयगा
अनपढ भोंदू राष्ट्र नियन्ता बन जायेंगें
कई दशकों से खाया है अब भी खायेंगें
आज सियासी लाश बोष की छान रहे हेै
जब जिन्दा था, तब ये उससे अनजान रहे है
सम्मान अगर घर में मिलता,क्यो बाहर जाता
किस मूंह से अब जोड रहे हो उससे नाता
मरी हुयी लाशों के अब मत कफन उठाओ
उस मिट्टी को ना छेडो,मत आग लगाओ
हम सूभाष की बात करे, औकात नही है
अब इस भारत में वीरो के जज्बात नही है
इस राजनीति मे अब कितना उपयोग करोगे
इन वीर शहीदो से कब तक उद्योग करोगे
बुनियादो के पत्थर पर मत सेध लगाओ
तुम तो बस, भारत को लूटो, मिलकर खाओ
राश्ट्र भक्त की भाव भंगिमा दिल में लाओ
प्रतिमा गौण करो प्रतिभा पर पुष्प चढाओ
राष्ट्र भक्ति संस्कार समर्पित शिशू बनाओ
सूभाष,भगत का भारत हो कुछ ऐसा गाओ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो098973998
rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:
Post a Comment