Tuesday, September 29, 2015

जब मुगलों ने आक्रमण किया उनकी संख्या मात्र 6000 थी और हम तैंतिस करोड थे,जब अंग्रेजों ने आक्रमण किया उनकी संख्या साठ हजार थी,और हम साठ करोड थे, आज राजनीति हम पर आक्रमण कर रही है हम125 करोड हैं, क्या यही भारत है।

सन्देह
साठ हजारी अंग्रेजो ने साठ करोड़ पर राज किया
अमर शहीदों को उकसा कर मरने पर मोहताज किया
राम,कृष्ण की कूटनीति और परणीती को याद करो
चाणक्यों के मूल्यों पर, ना कायरता फरियाद करो

आर्य - खण्ड को मुट्ठी भर अंग्रेज लूटकर चले गये
अनुपातों में जनसंख्या के, हमें कूट कर चले गये
जिनमें था जज्बा भारत का,मर्दो की मौत मरे हम पर
देश अभी तक जिन्दा है, उन अमर शहीदों के दम पर

हम भगतसिंह,शेखर,सूभाष और राजगुरू को गाते हैं
याद शहीदों की लेकर , व्यभिचार ध्वजा फहराते हैं
बंग्ला , पाकिस्तान कटा,क्यों आधा हिन्दुस्तान छंटा
धर्म,मजहब की जाति से क्यों घर-घर में इन्सान बॅंटा

अपनी ही झूठन आज हमें सरहद से आॅंख दिखाती हेै
राष्ट्र- गीत को किस मुॅंह से,ये मरी हूकूमत गाती है
आजादी के स्वाभिमान का जज्बा नजर नही आता
व्यभिचारी धवल लिबासों में जनता को कभी नही भाता

मुटठी भर मुगल हूकूमत में,इस राम,कृष्ण की धरती में
इतिहास गवाह है,जयचन्दों की भीड़ यवन की भरती में
अंग्रेज हूकूमत की सैना , गद्दार पैरवी करते थे
हम भारतवाशी अपनो की निन्दा से जिन्दा मरते थे

जिनमें था जज्बा आजादी, बे - मौत मरे अंग्रेजों से
इस राजनीति में कायरता सजती फूलों की सेजों से
आत्म सर्मपण कर लेना , ये जज्बाती पैगाम नही
साठ करोड़ की जनता में,कुछ का मरना अन्जाम नही

वेद, शास्त्र, इतिहासों में, वीरों की गौरव-गाथा हो?
आर्य खण्ड की रचना का रचनाकर परं विधाता हो?
ये ऋषियों की तपस्थली, व्यभिचार, छलों को ढोती है
कवि ‘आग’ की कलम यहाॅं, चिन्गार, लपट से रोती है!!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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