चार-लाचार
कितने सुन्दर नाम तुम्हारे, कर्मो से लाचार हो गयी
पहले चर्चा में दो ही थी,अब चर्चा में चार हो गयी
दो मोदी पर महरबान है, दो मोदी की कदरदान हेै
अब तो ये चारों मातायें भारत माँ की लुटि शान है
अर्जी डीग्री, फर्जी डीग्री, ये कैसी मनमर्जी डीग्री
मानव संसाधन मंत्री की ये कैसी खुदगर्जी डीग्री
बडी-बडी शिक्षण संस्थाओं के निर्णय को लेने वाली
संविधान की शपत को खाने वाले शपतपत्र भी जाली
सुषमा तुमको भारत माँ की नारी शक्ति मान रहे थे
तेरे भाषण सुनकर, नारी की अभिव्यक्ति जान रहे थे
डाकू के चक्कर में तुम भी भारत माँ को लाँध गयी
संविधान की कसम,रसम की खूटी में ही टाँग गयी
वशुन्धरा की त्वरा देखकर,लैला,मंजनू याद आ गये
राणा,जयसिंह की धरती में अब मोदी उस्तादआ गये
पुत्र-मोह में राज - धर्म के कर्म, मर्म सब भूल गयी
इस काले - पीले मोदी की गोदी में मैया झूल गयी
पंकजमुण्डा को चामुण्डा अब तक हम भी मान रहेथे
नयी नवेली इस बाला को बाला साहब जान रहे थे
अब महाराष्ट्र में धृतराष्ट्र के वंश दिखायी देते हेै
राजनीति में कृष्ण कंहा अब, कंस दिखयी देते है
चमत्कार है ये भी अपनी गलती को नही मान रहे हैं
चोरी सीना जोरी करके , कैसे सीना तान रहे हैं
कृपाचार्य और द्रोण,भीष्म भी,लाचारी में मौन खडे हैं
धर्म - युद्व में धर्म दलों के, घर में ही कई घाघ धडे हैं
काँग्रेस तो मामा शकुनि बनकर चौपड खेल रही है
चार देवियाँ इस जूँवे में दुर्योधन को झेल रही है
कांग्रेस की पिच पर कैसा सत्ता दल का खेल निराला
दोनो ने ही ललित मोदी का अपनेअपने ढंग से पाला
सारी दुनिया देख रही है,मोदी भैय़्या कुछ तो बोलो
अपने वादे याद करो, व्यभिचार को खुल कर खोलो
खुद को चौकीदार कहा,तुमअसमंजस मे मौन होगये
कवि आग कहता है,मोदी कुछ तो बोलो कंहा खो गये।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
कितने सुन्दर नाम तुम्हारे, कर्मो से लाचार हो गयी
पहले चर्चा में दो ही थी,अब चर्चा में चार हो गयी
दो मोदी पर महरबान है, दो मोदी की कदरदान हेै
अब तो ये चारों मातायें भारत माँ की लुटि शान है
अर्जी डीग्री, फर्जी डीग्री, ये कैसी मनमर्जी डीग्री
मानव संसाधन मंत्री की ये कैसी खुदगर्जी डीग्री
बडी-बडी शिक्षण संस्थाओं के निर्णय को लेने वाली
संविधान की शपत को खाने वाले शपतपत्र भी जाली
सुषमा तुमको भारत माँ की नारी शक्ति मान रहे थे
तेरे भाषण सुनकर, नारी की अभिव्यक्ति जान रहे थे
डाकू के चक्कर में तुम भी भारत माँ को लाँध गयी
संविधान की कसम,रसम की खूटी में ही टाँग गयी
वशुन्धरा की त्वरा देखकर,लैला,मंजनू याद आ गये
राणा,जयसिंह की धरती में अब मोदी उस्तादआ गये
पुत्र-मोह में राज - धर्म के कर्म, मर्म सब भूल गयी
इस काले - पीले मोदी की गोदी में मैया झूल गयी
पंकजमुण्डा को चामुण्डा अब तक हम भी मान रहेथे
नयी नवेली इस बाला को बाला साहब जान रहे थे
अब महाराष्ट्र में धृतराष्ट्र के वंश दिखायी देते हेै
राजनीति में कृष्ण कंहा अब, कंस दिखयी देते है
चमत्कार है ये भी अपनी गलती को नही मान रहे हैं
चोरी सीना जोरी करके , कैसे सीना तान रहे हैं
कृपाचार्य और द्रोण,भीष्म भी,लाचारी में मौन खडे हैं
धर्म - युद्व में धर्म दलों के, घर में ही कई घाघ धडे हैं
काँग्रेस तो मामा शकुनि बनकर चौपड खेल रही है
चार देवियाँ इस जूँवे में दुर्योधन को झेल रही है
कांग्रेस की पिच पर कैसा सत्ता दल का खेल निराला
दोनो ने ही ललित मोदी का अपनेअपने ढंग से पाला
सारी दुनिया देख रही है,मोदी भैय़्या कुछ तो बोलो
अपने वादे याद करो, व्यभिचार को खुल कर खोलो
खुद को चौकीदार कहा,तुमअसमंजस मे मौन होगये
कवि आग कहता है,मोदी कुछ तो बोलो कंहा खो गये।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
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