अभिशिप्त अवतरण
क्यों होते हो पैदा भगवन भूखे नंगे देशों में
करते हैं दिन रात लफंगे देखो दंगे देशों में
बन जाती हैं परंपरायें कुछ भिखमंगे देशों में
बूरे - भले भी तेरे नाम से होते चंगे देशों में
हम शदियों से तेरे नाम की ही रायल्टी खाते हैं
ग्रन्थ, काव्य में तेरी रचना के ही गाने गाते हैं
फिर बनते, ना जाने कितने मजहब तेरे नामों से
छिड. जाती है जंग यंहा पर, पूजा के पैगामो से
कौमे देखो हिंदू, मुश्लिम, सिक्ख, ईसाइ हो जाती हैं
मंडराती हैं, माैते पूजा घर में मानव को खाती हैं
तेरा नाम सहारा लेकर जनता नेता बन जाती है
रुढीवादी मुर्दा लाशें हर मजहब को क्यों भाती हैं?
दुनिया के,हर धरम्, मजहब में तेरी ओर इशारा है
भारत में तो हर कब्जे के पीछे तू ही सहारा है
लावारिस मन्दिर, मस्जिद भी तेरा गाना गाता है
आज देश में जन - मत से,तू ही, सरकार,बनाता है
आड में तेरी धर्मों के भक्तों ने परचम लहराया
राजनीति में अल्लाह, ईश्वर कैसे कुरूक्षेत्र में आया
हो जाती है शूरू फजीहत ,इन पशुओं की डारों में
मुझे माफ करना,मैं तो बस, पढता हूॅं अखबारों में
ब्रह्माण्ड का निर्णायक भी न्यायालय में जाता है
पेशकार भी अल्लाह, ईश्वर की आवाज लगाता है
कैसे हिन्दु, मुस्लिम की, ये पैरोकारी बन जाती है
बच्चों को बच्चा कहने में भारत माॅं भी शर्माती है
बे-रोजगारी, मंहगायी को , नेता फिर से भूल गये
मन्दिर,मस्जिद के सर्कस में नेता फिर से झूल गये
डेढ अरब के तमाश-बीन को, ये ही जोकर भाजाते है
हिन्दू,मुस्लिम नेता,मन्दिर,मस्जिद से रोटी खाते हैं
हे अल्लाह, ईश्वर ये विनती है बख्शो मेरे देश को
कैसे देखूं लडे सडक पर अल्लाह को अखिलेश को
मानव चरता धर्म भूमि में ,क्या पशुओं का बाडा है
इन सब रगडों झगडों का बस,हिंदुस्तान अखाडा है ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
क्यों होते हो पैदा भगवन भूखे नंगे देशों में
करते हैं दिन रात लफंगे देखो दंगे देशों में
बन जाती हैं परंपरायें कुछ भिखमंगे देशों में
बूरे - भले भी तेरे नाम से होते चंगे देशों में
हम शदियों से तेरे नाम की ही रायल्टी खाते हैं
ग्रन्थ, काव्य में तेरी रचना के ही गाने गाते हैं
फिर बनते, ना जाने कितने मजहब तेरे नामों से
छिड. जाती है जंग यंहा पर, पूजा के पैगामो से
कौमे देखो हिंदू, मुश्लिम, सिक्ख, ईसाइ हो जाती हैं
मंडराती हैं, माैते पूजा घर में मानव को खाती हैं
तेरा नाम सहारा लेकर जनता नेता बन जाती है
रुढीवादी मुर्दा लाशें हर मजहब को क्यों भाती हैं?
दुनिया के,हर धरम्, मजहब में तेरी ओर इशारा है
भारत में तो हर कब्जे के पीछे तू ही सहारा है
लावारिस मन्दिर, मस्जिद भी तेरा गाना गाता है
आज देश में जन - मत से,तू ही, सरकार,बनाता है
आड में तेरी धर्मों के भक्तों ने परचम लहराया
राजनीति में अल्लाह, ईश्वर कैसे कुरूक्षेत्र में आया
हो जाती है शूरू फजीहत ,इन पशुओं की डारों में
मुझे माफ करना,मैं तो बस, पढता हूॅं अखबारों में
ब्रह्माण्ड का निर्णायक भी न्यायालय में जाता है
पेशकार भी अल्लाह, ईश्वर की आवाज लगाता है
कैसे हिन्दु, मुस्लिम की, ये पैरोकारी बन जाती है
बच्चों को बच्चा कहने में भारत माॅं भी शर्माती है
बे-रोजगारी, मंहगायी को , नेता फिर से भूल गये
मन्दिर,मस्जिद के सर्कस में नेता फिर से झूल गये
डेढ अरब के तमाश-बीन को, ये ही जोकर भाजाते है
हिन्दू,मुस्लिम नेता,मन्दिर,मस्जिद से रोटी खाते हैं
हे अल्लाह, ईश्वर ये विनती है बख्शो मेरे देश को
कैसे देखूं लडे सडक पर अल्लाह को अखिलेश को
मानव चरता धर्म भूमि में ,क्या पशुओं का बाडा है
इन सब रगडों झगडों का बस,हिंदुस्तान अखाडा है ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
मो09897399815
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