Friday, June 12, 2015

          दिल्ली के शेखचिल्ली
राजनीति  में  जूते  खाना  और   खिलाना  आम बात है
पाँच खसम की आप  पार्टी गौर से  देखो  अभी अनाथ है
अहंकार की सारी  कडियां  जुडी हुयी, पर अलग-थलग है
काठ की हण्डी फुंकी जा रही, ये  तो उसकी एक झलक है

ज्यादा    बुद्विमानी   होना   राजनीति    में  अभिशाप है
सत्ता  और  सियासी  पंचायत  में  गुण्डा  अलग खाप हेै
योगेन्दर,प्रशान्त  और गाँधी, पुरातत्व  अवशेष  हो गये
आशूतोश, गोपाल,सिसोदिया  चाण्क्यो  के  भेष  हो गये

संजय और,विस्वास आम के इस झगडे में खास हो गये
खेतान  सरीखे   छोटे - छोटे   सारे   पप्पू  पास  हो गये
सढसठ   डलहौजी    के  खोजी, फौजी,  रोजी  ढूँढ  रहे है
मठाधीस  अरविन्द  केजरी, सब  चेलो  को   मूँड  रहे है

काठ  की  हण्डी राजनीति  के ताप,चाप  को  झेल रही है
दिल्ली में  बच्चो  की  सैना  देख   कबडडी   खेल रही है
सारा  भारत  सोच  रहा  था,सर्कस में  कुछ नया खेल है
राजनीति  में  स्वाभिमान, सिद्यान्त  हमेशा  रहा फेल हेै

काँग्रेस  भी  सत्तर  साल    पुरानी,  मिटटी   चाट  रही है
सिद्यान्त स्वंय के तीस साल से बी.जे.पी.भी  बाँट रही है
स.पा.बा.स.पा.,ममता,समता,घुटनो के बल  दौड रही है
दो  साल  की  आप  पार्टी,  स्वाँस  हांप  कर  छोड रही है

छल कपटों की राजनीति में मर कर  भी तो जीना सीखो
अपनो के ही  जूते खाकर, जहर  जहन  का  पीना सीखो
छोटे - मोटे  स्वार्थ  स्वंय  ही  अहंकार  से  गिर  जाते है
तेज  दौडने   वाले   शावक,  राजनीति  में  मर  जाते है

इतिहास गवाह है अपनाे का अपमान  हमेशा मरवाता है
पद  के  मद  में हद से  कद भी,रद्द   होकर जूते खाता है
अपनो  के  मेहनत  के आँशू  से  बुनियादे हिल जाती है
सच्चायी  को  कवि आग की कविताएं खुल कर गाती है।।
                 राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
                         मो0 9897399815
              rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:

Post a Comment