महा-योग
दो वक्त की रोटी हर गरीब को अगर योग से मिल जाये तो
फटे दिलों के फटे लिबास को अगर योग ये सिल जाये तो
नींव मजहब की सम्प्रदाय की अगर योग से हिल जाये तो
मोटी खाले वैमनस्य की अगर योग से छिल जाये तो
विश्वगुरू क्या भारत खुद, बह्माण्ड गुरू भी लिख सकता है
राजनीति का कफन हटा दो योग सभी को दिख सकता है
व्यभिचारी और भ्रष्टाचारी, खुदी सर्मपण राष्ट्र को कर दे
मठ,मन्दिर और धर्म ठिकाने, माया राष्ट्र कोष में भर दे
आलीशान भवन में अपने बे - घर को भी घर दिलवा दे
हर गरीब की मूल समस्या, मेहनत के बदले मिलवा दे
भूखे को रोटी मिल जाये, क्या योग में टिक सकता है
राजनीति का कफन हटादो योग सभी को दिख सकता है
सब जमाखोर और काले धन के मतवाले भी आगे आयें
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख, इसाई अपना राष्ट्र गीत ना गायें
एक कौम हो, एक व्योम हो,सूरज ,तारे एक सोम हो
मानवता के खिले रोम हो ,एक धर्म का यज्ञ होम हो
आने वाला हर बच्चा भी ,संस्कारो को सिख सकता हेै
राजनीति का कफन हटादो योग सभी को दिख सकता है
भाव - भंगिमा, सब की भांषा, भारत में भारत माता हो
भेद - भाव सम्भाव हृदय का गीत प्यार के ही गाता हो
मजहब अपनी अकड छोड दे भारत मां की अभिलाषा में
हिन्दू सम्प्रदाय को छोडें,वशुधैव कुटुम्बकम् की आशा में
फिर बसन्त की हरियाली में,येपतझड भी टिक सकता है
राजनीति का कफन हटादो योग सभी को दिख सकता है
ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य,शूद्र भी अपना-अपना धर्म निभायें
जांति-पांति के बन्धन काटें, भेद हटाकर गले लगायेें
केवल कर्म,धर्म बन जाये उपनिषद वेद की इस वाणी से
जनगणमनअधिनायक निकले भारतमां के हर प्राणी से
कवि आग तो पातञ्जलि की विरहवेदना लिख सकता है
राजनीति का कफन हटादो योग सभी को दिख सकता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहु गुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
दो वक्त की रोटी हर गरीब को अगर योग से मिल जाये तो
फटे दिलों के फटे लिबास को अगर योग ये सिल जाये तो
नींव मजहब की सम्प्रदाय की अगर योग से हिल जाये तो
मोटी खाले वैमनस्य की अगर योग से छिल जाये तो
विश्वगुरू क्या भारत खुद, बह्माण्ड गुरू भी लिख सकता है
राजनीति का कफन हटा दो योग सभी को दिख सकता है
व्यभिचारी और भ्रष्टाचारी, खुदी सर्मपण राष्ट्र को कर दे
मठ,मन्दिर और धर्म ठिकाने, माया राष्ट्र कोष में भर दे
आलीशान भवन में अपने बे - घर को भी घर दिलवा दे
हर गरीब की मूल समस्या, मेहनत के बदले मिलवा दे
भूखे को रोटी मिल जाये, क्या योग में टिक सकता है
राजनीति का कफन हटादो योग सभी को दिख सकता है
सब जमाखोर और काले धन के मतवाले भी आगे आयें
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख, इसाई अपना राष्ट्र गीत ना गायें
एक कौम हो, एक व्योम हो,सूरज ,तारे एक सोम हो
मानवता के खिले रोम हो ,एक धर्म का यज्ञ होम हो
आने वाला हर बच्चा भी ,संस्कारो को सिख सकता हेै
राजनीति का कफन हटादो योग सभी को दिख सकता है
भाव - भंगिमा, सब की भांषा, भारत में भारत माता हो
भेद - भाव सम्भाव हृदय का गीत प्यार के ही गाता हो
मजहब अपनी अकड छोड दे भारत मां की अभिलाषा में
हिन्दू सम्प्रदाय को छोडें,वशुधैव कुटुम्बकम् की आशा में
फिर बसन्त की हरियाली में,येपतझड भी टिक सकता है
राजनीति का कफन हटादो योग सभी को दिख सकता है
ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य,शूद्र भी अपना-अपना धर्म निभायें
जांति-पांति के बन्धन काटें, भेद हटाकर गले लगायेें
केवल कर्म,धर्म बन जाये उपनिषद वेद की इस वाणी से
जनगणमनअधिनायक निकले भारतमां के हर प्राणी से
कवि आग तो पातञ्जलि की विरहवेदना लिख सकता है
राजनीति का कफन हटादो योग सभी को दिख सकता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहु गुणा(आग)
मो0 9897399815
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