Sunday, June 28, 2015

                         मन की बात
मन की  बाते  बोल  रहे  हो  कुछ  तो  जन की बाते बोलो
चुप रहना  अब  ठीक नही हेै,भैया थोडा  तो मूँह को खोलो
लालकृष्ण  और  गोविन्दा  भी  मन  की  बाते बोल रहे हैं
राजनीति की शल्य चिकित्सा,सब चिन्तन से खोल रहे हैं

आडवानी  ने  बी. जे. पी. को  खून  पिलाकर  के  पाला है
आर.एस.एस और शिवसैना को  परिवर्तित करके ढाला है
छोटे  -  मोटे   धर्म   दलो   के  संयोगो  से  आज  खडे हो
बूढों   के   आगे   लगता  है   आज  देश  में  तुम्ही बडे हो

जिसने तुम को हाथ पकड कर चलना ढलना सिखलाया है
राष्ट्र-धर्म  का  गीत  अटल  ने, गली-गली,घर-घर  गाया है
उनकी  बुनियादों  के  उपर  बी. जे. पी. का  भवन  खडा है
असमंजस   होता  है  मुझको   ये    कैसा   विरीत  धडा है

ललित मोदी  अब  राजनीति  की बुनियादों को खोद रहा है
राजनीति  के  खंजर  से  ही  सत्ता - दल  को   गोद  रहा है
गन्दी  परम्पराओ  से  तो   राष्ट्र - धर्म   भी   मर  जायेगा
राजनीति  का  कोई  दल  हो जनमत को क्या समझायेगा

ये  फोडा  नासूर  बने  ना ,उपचार  समय  से  हो  जाने दो
लिप्त  दोष  में  जो - जो  भी  हों, कुर्सि  जाये  तो   जाने दो
आने वाला समय कठिन  है  जनता  को  क्या समझाओगे
सारे   नेता  फँसे  पडे   है  किस - किस  का  गाना गाओगे

इस   कीडे   को   काँग्रेस   ने ,अपने   ढंग   से  पनपाया है
ज्यादा   चरित्रवान   लोगों  ने  गन्द  सियासत  में खाया है
अपने  और  पराये  जो  भी  है, उन  सब  को  नंगा  कर दो
लम्बी  राजनीति  चाहते  हो, समय  से  पहले पंगा  कर दो

सारी  जनता   लालाहित  है  इस   निर्णय   की  लाचारी में
कौन  कहा  तक  सहयोगी  है, ललित  कला के व्यापारी में
राजनीति  का  कोई  दल  हो ,गरिमा   भारत  की   खोती हेै
नालायक   पुत्रों   के   कारण,  भारत   माता   क्यों  रोती है

तर्क - कूतर्क  से  तोड-मरोड  कर , घी  आग में डाल रहे हो
जनता भी  ये  समझ  रही  है, तुम  डाकू  को  पाल  रहे हो
मेरा  चिन्तन ये  कहता  है समय  आ गया खुल कर बोलो
कवि आग  की  कविता  सुनलो,मन की बातो से मूँह खोलो।।
                   राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                          9897399815
              rajendrakikalam.blogspot.com  

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