दुर्भाग्य का सौभाग्य
एक आदमी लंदन बैठा सबके मूँह पर थूक रहा है
ये भारत का प्रजातन्त्र हैे जूते खाकर चूक रहा है
कानूनो के दाव - पेंच और मतभेदो में झगड रहे हो
कांग्रेस, बी .जे. पी , मिलकर मर्यादा को रगड रहे हो
एसा नेता मुझे बताओ जो मोदी से अनजान रहा हो
सत्ता में भी कौन बचा है जो माल ना छान रहा हो
पहले वालों ने भी खाया अब वाले भी लूट रहे हेैं
अजगर हम ही पाल रहे,जो माल श्वांस से घूंट रहे हैं
जिनको जनता ने नकारा, वो भी मंत्री बन जाते हैं
अर्जी-फर्जी शपत - पत्र से,शपत राष्ट्र की क्यों खाते हैं
कांग्रेस हो बी. जे. पी .हो आओ जनता पंगा कर दो
अगर सपूत हो भारत माँ के चौराहों पर नंगा कर दो
ऐसा कर दो ये भविष्य में फिर चुनाव ना लडने पायें
प्रजातन्त्र में अय्यासी के कीडे फिर ना पडने पायें
चोरों को प्रमाणित करने वालो के भी मूँह पर थूको
समय आ गया भारत वालों, जूते मारो अब मत चूको
दुनिया भर में इनके कारण हम बदनामी झेल रहे हैं
हम भारत के जिन्दे मालिक ,मुर्दे हम से खेल रहे हैं
हम हनुमान है,अपनी ताकत शापित हो कर भूल गये हैं
इसिलिये तो सभी निशाचर,व्यभिचार से फूल गये है
चोर, उचक्का, डाकू जिनको सारी दुनिया मान रही है
मेरे देश में उन चोरों की नश्लें सीना तान रही है
दुखः होता है जनता की आँखो में राजनीति चस्मे हैेंं
यही कारण है प्रजातन्त्र में भष्टाचार जनित र स्मे हैं
दुर्भागय है, मेरी कविता राजनीति से जोड रहे हो
बिना पढे ही कविताओ के छन्द, द्वन्द से तोड रहे हो
राजनीति के चस्मे वालों मेरी कविता पढनी छोडो
मेरा कोई शौक नही है मुझको राजनीति से ना जोडो
मेरी तो बस यही साधना, जागो जनता अब तो जागो
भारत माँ के आँशू पोंछो, चोरों के पीछे मत भागो
राष्ट्र-द्रोह ,र्निलज्ज डाकूओं के मूँह पर मैं नही थूकता
मैं कवि आग हूँ सच्चायी को लिखने में भी नही चूकता।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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