भ्रष्ट राष्ट्र में धृष्ट राष्ट्र
अब तो बीहड के डाकू भी राजनीति में खास हो गये
सुषमा माता तेरे फैसले दुनिया में उपहास हो गये
जिसको भारत ढूँढ रहा था, तेरे चरणो में अर्पण हैे
चाल,चरित्र ,चेहरों का भी अपना - अपना ही दर्पण है
गृह-मंत्रालय ढूँढ रहा हेै, राष्ट्र - द्रोह के अपराधी को
झेल रहा है पी.एम. मोदी, मोदी की ही उस्तादी को
अच्छा होता सुषमा माता पकड उसको भारत लाती
मैं भी अपनी रचनाओं मे खुलकर लिखता तेरी ख्याति
पर तेरी इस मानवता से दानव मस्ती काट रहा हैे
असमंजस मे पी.एम. मोदी तर्क सियासी छाँट रहा है
तेरे पक्ष में सहयोगी भी बोल - बोल कर हार गये हैं
बुद्वि - बल्लभ, वाणी - भूषण, शब्दो के भी पार गये हैं
हर चैनल पर तर्को और कुतर्को का संग्राम मचा है
भ्रूण गर्भ में पनप रहा है ,नजरों से अब कंहा बचा है
स्वीकार करो जो भूल हुयी है तर्को से ज्यादा फैलेगी
हल्के पन की राजनीति की व्याधी तू कब तक झेलेगी
जानी-मानी अधिवक्ता भी,अपने फन में फेल हो गयी
संविधान की धाराएं अब राजनीति की खेल हो गयी
मानवता की भाव-भंगिमा, अपराधों पर लिपट रही है
मुजरिम मोदी के आगे, न्याय व्यवस्था सिमट रही है
राजनीति का यही निचोड हैे डाकू, मुजरिम राज करेंगे
नेताओं से आदर्शो के, बचे - खुचे अल्फाज मरेंगे
अपराधों पर राजनीति भी अपनी कीमत आँक रही हेै
राष्ट्रद्रोह को कवि आग की कलम,लपट में झाँक रही है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
अब तो बीहड के डाकू भी राजनीति में खास हो गये
सुषमा माता तेरे फैसले दुनिया में उपहास हो गये
जिसको भारत ढूँढ रहा था, तेरे चरणो में अर्पण हैे
चाल,चरित्र ,चेहरों का भी अपना - अपना ही दर्पण है
गृह-मंत्रालय ढूँढ रहा हेै, राष्ट्र - द्रोह के अपराधी को
झेल रहा है पी.एम. मोदी, मोदी की ही उस्तादी को
अच्छा होता सुषमा माता पकड उसको भारत लाती
मैं भी अपनी रचनाओं मे खुलकर लिखता तेरी ख्याति
पर तेरी इस मानवता से दानव मस्ती काट रहा हैे
असमंजस मे पी.एम. मोदी तर्क सियासी छाँट रहा है
तेरे पक्ष में सहयोगी भी बोल - बोल कर हार गये हैं
बुद्वि - बल्लभ, वाणी - भूषण, शब्दो के भी पार गये हैं
हर चैनल पर तर्को और कुतर्को का संग्राम मचा है
भ्रूण गर्भ में पनप रहा है ,नजरों से अब कंहा बचा है
स्वीकार करो जो भूल हुयी है तर्को से ज्यादा फैलेगी
हल्के पन की राजनीति की व्याधी तू कब तक झेलेगी
जानी-मानी अधिवक्ता भी,अपने फन में फेल हो गयी
संविधान की धाराएं अब राजनीति की खेल हो गयी
मानवता की भाव-भंगिमा, अपराधों पर लिपट रही है
मुजरिम मोदी के आगे, न्याय व्यवस्था सिमट रही है
राजनीति का यही निचोड हैे डाकू, मुजरिम राज करेंगे
नेताओं से आदर्शो के, बचे - खुचे अल्फाज मरेंगे
अपराधों पर राजनीति भी अपनी कीमत आँक रही हेै
राष्ट्रद्रोह को कवि आग की कलम,लपट में झाँक रही है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
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