Monday, June 15, 2015

                      भ्रष्ट राष्ट्र में धृष्ट राष्ट्र
अब  तो बीहड  के  डाकू  भी राजनीति में खास हो गये
सुषमा माता  तेरे  फैसले  दुनिया  में  उपहास  हो गये
जिसको  भारत  ढूँढ  रहा  था, तेरे  चरणो  में  अर्पण हैे
चाल,चरित्र ,चेहरों  का  भी  अपना - अपना ही दर्पण है

गृह-मंत्रालय  ढूँढ  रहा   हेै, राष्ट्र - द्रोह  के  अपराधी को
झेल रहा  है  पी.एम. मोदी, मोदी   की  ही उस्तादी को
अच्छा  होता  सुषमा माता  पकड  उसको भारत लाती
मैं भी अपनी रचनाओं मे खुलकर लिखता तेरी ख्याति

पर  तेरी   इस  मानवता  से  दानव  मस्ती काट रहा हैे
असमंजस  मे पी.एम. मोदी  तर्क  सियासी छाँट रहा है
तेरे  पक्ष  में  सहयोगी  भी  बोल - बोल कर हार गये हैं
बुद्वि - बल्लभ, वाणी - भूषण, शब्दो  के  भी पार गये हैं

हर चैनल  पर  तर्को  और  कुतर्को  का  संग्राम मचा है
भ्रूण गर्भ में  पनप  रहा  है ,नजरों  से अब कंहा बचा है
स्वीकार  करो  जो भूल हुयी है तर्को  से  ज्यादा फैलेगी
हल्के पन की राजनीति की व्याधी तू कब  तक झेलेगी

जानी-मानी अधिवक्ता  भी,अपने फन  में फेल हो गयी
संविधान  की  धाराएं अब  राजनीति की खेल  हो गयी
मानवता की भाव-भंगिमा, अपराधों  पर  लिपट रही है
मुजरिम मोदी के आगे, न्याय  व्यवस्था सिमट रही है

राजनीति का यही  निचोड हैे डाकू, मुजरिम राज करेंगे
नेताओं  से  आदर्शो   के, बचे - खुचे   अल्फाज  मरेंगे
अपराधों पर राजनीति भी  अपनी  कीमत आँक रही हेै
राष्ट्रद्रोह को कवि आग की कलम,लपट  में झाँक रही है।।
             राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                  मो0 9897399815
        rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:

Post a Comment