Saturday, June 20, 2015

                  य़ोग का उपयोग
आनन्द विभोर हो करके मैने जब  मोदी  को योग  में देखा
पौराणिक विस्मृतियाँ जागी जिसकी अब तक दबी थी रेखा
इस आदिकाल  की  परम्परा  को घर-घर  में पहुचना होगा
नई  पीढी कुछ स्वस्थ बने  बस, यही राष्ट्र  का  गाना होगा

हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई  एक बने बस,यही कला हेै
सम्पभुत्व  हो  राष्ट्र  हमारा,सब कौमो  का   तभी  भला है
ये सभी  रोग  की  एक  दवा  है,व्यायामो  के आयामो  की
अभ्यासो से  लक्षित  होगी,  मानव  मंजिल  अन्जामो की

तन, मन सुन्दर बन  जाये  तो हरा  भरा मरूधान  बनेगा
राम कुष्ण महावीर, बुद्व  का  फिर  से  हिन्दुस्तान  बनेगा
सूभाष,भगत,शेखर,बिसमिल्लाह,फिर से धरती मे आयेंगे
सारी कौमे  राष्ट्र - भक्ति  के  गीत,  प्रीत  मिल कर  गायेंगे

बस योग,योग हो,राजनीति से विद्या  कलुषित  ना हो पाये
हो निर्विकार, निशुल्क  प्रेरणा, मानव, मानव तक पंहुचाये
स्कूल मदरसों, संस्थानो में, नियमित  सब  अभ्यास  करें
ये मिसाल बन  जाये   भारत, बस  भारत   की  आस करे

अब रूग्ण शरीरो  से  मुक्ति  हो  दुनियाँ  फिर से  ऐक  बने
ये वैमनस्यता  रगडे - झगडे  हटे, जगत   बस,  नेक  बने
पातञ्जलि  की  इस  विद्या   क  मुल्य  पेम है बंटता जाये
कवि  आग  इस  धर्म  धरा में, धर्म- धर्म  को  रचता जाये।।
                   राजेन्द्र प्रसाद बहु गुणा(आग)
                       मो0 9897399815
           rajendrakikalam.blogspot.com

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