Friday, June 5, 2015

                         गंगा स्वर्ग से नर्क में
हे माँ गगा इस कलियुग में कब तक तुझको साफ करेगे
राजनीति  में  तू  ही  बची है ,अब  सब तेरा  जाप करेगे
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख, इसाई के झगडो में  जान नही है
जाँति-पाँति  और  कौम कबीलो मे नेता का मान नही है

भव-सागर  तारण  माँ  गगा, इन  सबको  तू तार रही है
गंगा, जमुना   तहजीबों   की   सत्ता   मे  तू  धार   ही है
तेरे जल  में  बहने  वाला, मल  भी  नेता  बन  जाता है
तेरी  साफ - सफाई   करने   वाला  ही  तुझको  खाता है

तेरी   छाती   में  नौकाओं  के  क्रिडा  - दल  खेल  रहे है
गंगा  तट  पर  सभी  तामसी  माँस, मदिरा  पेल  रहे हेै
मच्छी, केकडे.  और जलमुर्गी, आखेटक से घिरी पडी है
गंगा  का  जल  बेचने  वालो  से  माँ  गंगा  चिरी पडी है

तेरे  नाम  से   संस्थाए   घाटो   पर चन्दा  काट  रही है
साधू, माई  और  पण्डो   की   पीढी  धन्धा   बाँट रही है
क्षत,विक्षत शव,हवन  धूलि और पत्र,पुष्प तू ही ढोती है
गंगा  मैली  पापी  से   कम , भक्तों  से  ज्यादा  होती है

अरब-खरब की  माया  तेरे  जल में समतल हो जाती है
तेरे  ही  कारण तो भारत  में  प्रदूषण की  भी ख्याति है
तेरे  जल  के  जाँच  परिक्षण से  संरक्षण मिल जाता है
प्रदूषण , जल - बोर्ड  नियन्त्रण  तेरे   नाम  ही खाता है

डाकू, चोर,  उचक्के,  पापी  के  पापो   को   काट  रही है
कही कंही  तो  जिला,गाव और पचायत  को  बाँट रही है
खनन  माफिया  तेरे  कारण अरब -खरब में खेल रहे हैं
जो  तेरे  अतरग  भक्त   है,  वो  तेरी  पीडा  झेल  रहे हैं

हे  माँ  गंगा ,आधे  भारत  को   तू  ही  तो पाल  रही है
गौ-मुख  से  गंगा  सागर तक, मूँह  में रोटी डाल रही है
जोगी,भोगी,व्यवसायी सब  तेरे  ही  गुण  क्यों  गाते है
तेरे  तट  पर  बसे  हुये  सब  तेरी   महिमा  से खाते है

व्यभिचारी,अत्याचारी  सब  तेरी  शरण, ग्रहण करते हैं
पाप, ताप, संताप तुझी  पर घो-धो  कर अर्पण करते हैं
कुम्भ लगाकर तेरे  नाम से ,कुम्भकरण  भी लूट रहे है
हर-हर  गंगे  के  नारे  से सब , मिटटी  तेरी  कूट रहे है

भागीरथ  के  पापों का  फल माँ  गगा  क्यों भोग रही है
जप,तप,पूजा,पाठ,तपस्या,इस कलियुग में  रोग रही है
हे माँ गंगा  इस  धरती  में  तेरा  अब  सम्मान  नही है
कवि आग  इस आडम्बर में ,माँ  गँगा  की शान नही है।।
                    राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
                           मो09897399815
              rajendrakikalam.blogspot.com

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