योग-दिवस या योग विवस
हे,पातञ्जलि योग दिवस में कुछ ना कुछ तो ऐसा करदो
व्यभिचारी, व्यवसायी, नेताओ में राष्ट्र-भक्ति को भरदो
काम,क्रोध,मद,लोभ,मोह के आसन,सासन साफ करादो
बस,तेरे नाम से खाने वाले आडम्बर को हाफ करादो
अष्टांग योग की पहली सीढी,कसरत में हसरथ दिखती है
योग बहाना बन जाता है ,राजनीति नफरत दिखती हेै
दुनियां में बीमार बहुत हैं तभी योग को मान रहे हैं
चैनल में व्यवसायी बाबा, अहंकार की शान रहे हैं
छल, कपटी, व्यभिचार शवो में,जीवन का संचार करादो
कौम,कबीले,जाँति-पाँति में,इस योगा से प्यार करादो
राष्ट्र-द्रोह के नेताओ मे राष्ट्र - भक्ति गलूकोष चढादो
नई पीढी, मुर्दा भारत में,उनमें भी कुछ जोश बढादो
तन,मन,बुद्वि शुद्व करो,वशुधैव कुटुम्बकम् की भांषा से
ये भारत,फिर से भारत हो योग-दृष्टि की अभिलाशा से
आसन,सासन और भाषण से योग-भोग ना बनने पाये
योग दिवश के बाद देश में, वैेमनस्य ना जनने पाये
ये भारत की गुप्त धरोहर, चौराहों की हाट बने ना
ये भारत की गुप्त धरोहर राजनीति की बाट बने ना
ये भारत की गुप्त धरोहर, वेद, शास्त्र की काट बने ना
ये भारत की गुप्त धरोहर, कामी जन की ठाठ बने ना
अच्छा है तुम योगदिवस मे कुछ अच्छा करना चाहते हो
सत्य,निष्ठ, निष्काम भावना, मानव में भरना चाहते हो
पातञ्जलि की त्याग तपस्या, वशुन्धरा में लहरायेगी
कवि आग की कवितायें भी संयोग योग से ही गायेगी।।
राजेन्द्र प्रसाद बहु गुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
हे,पातञ्जलि योग दिवस में कुछ ना कुछ तो ऐसा करदो
व्यभिचारी, व्यवसायी, नेताओ में राष्ट्र-भक्ति को भरदो
काम,क्रोध,मद,लोभ,मोह के आसन,सासन साफ करादो
बस,तेरे नाम से खाने वाले आडम्बर को हाफ करादो
अष्टांग योग की पहली सीढी,कसरत में हसरथ दिखती है
योग बहाना बन जाता है ,राजनीति नफरत दिखती हेै
दुनियां में बीमार बहुत हैं तभी योग को मान रहे हैं
चैनल में व्यवसायी बाबा, अहंकार की शान रहे हैं
छल, कपटी, व्यभिचार शवो में,जीवन का संचार करादो
कौम,कबीले,जाँति-पाँति में,इस योगा से प्यार करादो
राष्ट्र-द्रोह के नेताओ मे राष्ट्र - भक्ति गलूकोष चढादो
नई पीढी, मुर्दा भारत में,उनमें भी कुछ जोश बढादो
तन,मन,बुद्वि शुद्व करो,वशुधैव कुटुम्बकम् की भांषा से
ये भारत,फिर से भारत हो योग-दृष्टि की अभिलाशा से
आसन,सासन और भाषण से योग-भोग ना बनने पाये
योग दिवश के बाद देश में, वैेमनस्य ना जनने पाये
ये भारत की गुप्त धरोहर, चौराहों की हाट बने ना
ये भारत की गुप्त धरोहर राजनीति की बाट बने ना
ये भारत की गुप्त धरोहर, वेद, शास्त्र की काट बने ना
ये भारत की गुप्त धरोहर, कामी जन की ठाठ बने ना
अच्छा है तुम योगदिवस मे कुछ अच्छा करना चाहते हो
सत्य,निष्ठ, निष्काम भावना, मानव में भरना चाहते हो
पातञ्जलि की त्याग तपस्या, वशुन्धरा में लहरायेगी
कवि आग की कवितायें भी संयोग योग से ही गायेगी।।
राजेन्द्र प्रसाद बहु गुणा(आग)
मो0 9897399815
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