पर्वत का शर्बत
उत्तराखण्ड के बीहड को दो रत्न बडे अनमोल मिले
ढहती हुयी सत्ता को देखो ये रोकने वाले पोल मिले
प्रतिपक्षी सब चुप बैठे थे,उनके मूँह को कुछ बोल मिले
जनता का बैण्ड बजेगा अब, बैठे-बैठे ये ढोल मिले
ठाकुर का जिसने साथ दिया से उसका शुध्द मुनाफा है
उत्तराखण्ड की देव-भूमि का ये मजमून लिफाफा है
इस सत्ता और सियासत का ये भ्रष्टाचार नमूना है
तीन दशक से उत्तराखण्ड इनकी हरकत से सूना है
नवप्रभात के आने से अब सूरज हिम पर चमकेगा
भण्डारी के भर जाने से,अब देवो में दानव दमकेगा
हीरा सिंह का ग्रहण लगा जिससे अब ठाकुर खेलेगा
नौग्रह का ग्रहण हटा ठाकुर अब दसवां गह भी झेलेगा
इस राजनीति की भीडों में, अण्डे फुटते हैं नीडों में
मासूम मरे हैं इन पीडों में, हरकत होती है कीडों में
अब चाकू कद्दू पर पटको या कद्दू पटको चाकू पर
उत्तराखण्ड की इज्जत का दारोमदार टिका है डाकू पर
तीन दशक से हम सबने सर्कस में जोकर पाये हेैं
ये खेत साण्ड सब चाट गये ,पोखर पौधे कुम्लाहे हेैं
सब नंगे भूखे पनप गये इस अलग राज्य के साये में
कवि आग ये उत्तराखण्ड अब दीन खडा चौराहे में।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

No comments:
Post a Comment