Saturday, July 16, 2016

आखिरी-विकल्प
सभी विरोधी साथ खडे हैं, फिर काहे की मजबूरी हेै
डेड अरब की जनसंख्या में युद्व - भावना भी पूरी हेै
भारत में तो हर फोैजी की इच्छा अभी अधूरी हेै
बे - मतलब हम क्यों मरते हैं, अब संग्राम जरूरी हेै

राम-भक्त होकर भी अपना समय नष्ट क्यों करते हो
कुरूक्षेत्र तो सुना ही होगा फिर काहे को डरते हो
वंहा युद्व भी अपनो का था, यंहा युद्व भी अपनो का है
श्री कृष्ण ने कहा था अर्जुन,ये धन्धा ही सपनो का हेै

पाँच गांव के चक्कर में कोैरव जड - मूल से नष्ट हुये
ये काशमीर का झगडा है, जिससे ये इतने कष्ट हुये
अब नासूर बने इन घावों का, मोदी उपचार जरूरी है
क्याें अंग कटाना चाहते हो, क्या सत्ता की मजबूरी है

सत्ता में तुम बैठे गये , कुछ सत्ता का परित्राण करो
सात दशक की पीडा से, इस भारत का कल्याण करो
भारत के इस मस्तक पर भी दस्तक दो, सम्मान करो
बस,दो विकल्प हैं,युद्व करो या तो काशमीर को दान करो

अलगाव वाद की बात करें,क्या इनको कुछ भी शर्म नही
जिस भारत में पलते हैं,क्या वो भारत इनका धर्म नही
कितने ही बाप बदल डालो,अब लावारिस मौत बुलायेगी
ये सर्प विषैली पीढी है ,बस, अपने ही संपोले खायेगी

चूहों के छद्म छलों को हम, बर्दास्त करे, मन्जूर नही
हम कब तक इनको पालेंगे, ये जालिम है,वो शुर नही
आतिर - खतिर बन्द करो ये खुद लडकर मर जायेंगे
या तो खुद नत-मस्तक होगे, या पाकिस्तान समायेंगे

जंहा भरी जवानी भटकी है,उनसे अब कुछ भी आस नही
जंहा लाशें रोज छिटकती हैं,जिनको इतना एहसास नही
पाकिस्तान कुचल डालो, जो अमन-चैन को चाहते हो
कवि आग को पढ कर भी, बस,जनमत को बहलाते हो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
मो09897399815



























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