Thursday, July 7, 2016

गंगा में नंगा
मोदी भैया ,उमा माता ,मुझको तो अब, माफ करो
मेरा कूडा मुझ पर छोडो, बस अपना ही साफ करो
ये सभी लंगोटे ,ये परकोटे मेरे उपर बैठे हेैं
मां मां कह कर घुसे जा रहे ये कैसी घुसपैठे हैं
हिम्मत है तो मोदी भैया, बाबाओं को हाफ करो
मोदी भैया, उमा माता, मुझको तो अब, माफ करो

दुर्भाग्य मेरा है , मैं अब राजनीति से रोती हूँ
बच्चों से काेइ गिला नही है, बूढों का मल ढोती हूँ
जो जितना मुझको घ्याताहै,उतना ही शोषण करता हेै
आधा भारत मेरे कारण, धर्मो से रोटी चरता है
बहते - बहते बूढी हो गयी अब तो कुछ इन्साफ करो
मोदी भैया ,उमा माता, मुझको तो अब ,माफ करो

पर्वत काट-काट कर मैंने तुमको धरती लुटवायी है
जल से सींच सींच कर मैंने अपनी ही भत् पिटवायी है
बांट दिया है तन,मन,धन सब,भीख मांग कर बहती हूँ
गौ-मुख से गंगा सागर तक कू-कर्मो को ही सहती हूँ
ढोंग, फकीरी, आडम्बर का झूठा ना सन्ताप करो
मोदी भैया, उमा माता, मुझको तो अब ,माफ करो

मैं बैतरणी ,शंकर चरणी, पाप सभी के काट रही हूँ
स्वर्ग-मोक्ष से बहकर आयी,टुकडे सब के चाट रही हूँ
सीवर,फीवर,द्वन्द,गन्द ,मतिमंद मुझी पर डाल रहे हैं
रिद्व-सिद्व मैंने ही पाले,दो टके के मुझको पाल रहे हैं
जब तक मै बहती हूँ भैया जितना चाहे पाप करो
मोदी भैया, उमा माता, मुझ को तो अब, माफ करो

जितनी भी सरकारें आयी, सबने मेरे नाम से खाया
तकनीकी के नोैकर साहों ने प्रदूषण कवच बनाया
कुछ भक्तों की ,मेरे कारण सत्याग्रह से जान गंवायी
हे गंगा के ढोंगी भक्तों तुमको उनकी याद भी आयी
मेरे नाम की माला लेकर ,ना बैठो ना जाप करो
मोदी भैया, उमा माता, मुझको तो अब, माफ करो

बिजली, पानी, गिजर, कूलर सभी विरक्ति मांग रहे हैं
अपनी अय्यासी के कारण, मुझको शूली टांग रहे हैं
मेरी इज्जत चाहते हो तो, आओ ये संकल्प करो
बाबा हो तो भजन करो ,संसाधन अपने अल्प करो
मुझे सुरक्षित चाहते हो तो,ऐसे ना क्रिया कलाप करो
मोदी भैया, उमा माता, मुझको तो अब, माफ करो

सगर की लाशें साठ हजार ,धरती को धोने आयी थी
निर्मल जल की कल-कल में धर्म-कर्म की गहरायी थी
अब जो पापी और सन्तापी, जल में डुबकी मार रहे हैं
मैं दिन पर दिन सूख रही हूँ, सब अपने को तार रहे हैं
कवि आग तुम लिखते ही हो,कुछ तुम भी प्रलाप करो
मोदी भैया, उमा माता ,मुझको तो अब, माफ करो ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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