Sunday, July 17, 2016

भारत-पाक की वेदना
एक जमीं है जंहा एक है , दोनों का आकाश एक है
टूटे दिल के दो टुकडों में,आव भाव और आश एक है
जतन एक है कथन एक है,राजनीति का पतन एक है
धर्म मजहब की दोनों कौमें,भटक गयी हैं वतन एक है

कोइ आकर मुझे बता दो इस धरती में कहाॅं हद है
छाती से छाती मिलती हैं दीन इमान का कैसा कद है
दरिया दिली, समन्दर जैसा, पथ पर बैठा कैसा मद है
आन,बान और शान एक हैे, फिर परमादी कैसा पद है

सत्ता और सियासत की समसीर ने हमको काट दिया
राजनीति की जिल्लत ने शदियों से हमको बाॅंट दिया
अमन -चैन के चुल्हो से, चिनगारी को भडकाया है
सत्ता और सियासत ने शदियों से हमको खाया है

गीता और कुरान की भांषा, मानवता को जोड रही है
नासमझी की अभिव्यक्ति है हिन्दू, मुश्लिम मोड रही है
असमंजस में फंसी कौम धर्म ,मजहब को छोड रही है
द्वन्द-गन्द आतंकी भांषा, दोनो के घर तोड़ रही है

अब रोज मर रही दोनो कौमे आतंकी विस्फोटों से
प्रजातन्त्र भी खेल रहा है देख सियासी बोटों से
मिल जाती है पनाह यहाॅं पर हिजबुल को ओसामा को
क्यों दोनों कौमें खप्पर लेकर देख रही ओबामा को

पाल रहे थे ओसामा, इस्लाम मुकम्मल करने को
छिपे पडे़ हेैं आतंकी क्यो लावारिस ही मरने को
क्या दिखलाना चाहते हो तुम झूठे अमली जामो से
क्यो र्निदोशों को मार रहे हो अल्ला के पैगामों से

तरस रहीं हैं, दोनों कौमें टूटा दिल फिर से मिल जाये
फटे लिबासों की जन्नत कोई फरिस्ता तो सिल जाये
मजहब की झूठी बुनियादें,समरसता से खुद हिल जाये
नव-अंकुर सी दोनों कौमों के हृदय के ,गुल खिल जांये

हिन्दू-मुस्लिम एक बने , मन्दिर, मस्जिद बन जायेगें
कौमों को भडकाने वाले नेता भी मूंह की खांयेगें
अल्लाह, ईश्वर एक तत्व है, जेहादी क्यों भडकातें हैं
राजनीति के भिखमंगे क्यों कौम, कबीले ही गाते हैं

धर्मों के प्रवक्ता सारे, अब अपना मूंह बन्द करें
कौम,कबीले,जाति,मजहब की और ना ये दुर्गन्द करें
अब पाकिस्तानी, हिन्दुस्तानी सरहद एक बना डालो
कौमो के दुख दर्द को समझो,सांप समझ कर ना पालो

सरिता ,सागर ,जंगल , मंगल, डंडा , झंडा एक बनाओ
आशा, भांषा, भाव, भंगिमा, एक राष्ट्र का गाना गाओ
कौम एक हो,व्योम एक हो जहर जहन का दूर हटाओ
जम्बूद्वीप पुनः विकसित हो भारत माता के बन जाओ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815

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