जागो
अब वैमनस्यता छोडो मोदी उस इन्दिरा को याद करो
दुष्ट पडोसी हो जाये तो किञ्चत ना फरियाद करो
इनकी ही छाती को भेदा बंग्ला देश बना डाला था
जो बाप थे मौन हुये, जिस जिसने इनको पाला था
बस,याद करो उस शक्ति को अब खडे उठो जेहाद करो
अब वैमनस्यता छोडो मोदी उस इन्दिरा को याद करो
नब्बे हजार की सैना को इनके ही घर में घेर लिया
अभयदान ही गलती थी जो दुश्मन से मूंह फेर लिया
अब समय स्वयं ही बोल रहा है इनको सबक सीखाने का
ये समय मिला है मोदी जी फिर से इतिहास बनाने का
गरम खून है भारत का ,बस थोडा सा उन्माद करो
अब वैमनस्यता छोडो मोदी उस इन्दिरा को याद करो
उस कुरूक्षेत्र की घटना का महाभारत फिर से जाग उठे
फिर से मन्थन हो सागर का,दुश्मन के मूंह से झाग उठे
उस वक्त ये टुकडा भारत था,ये चिन्ता हमे संताती है
अब धरती पाकिस्तानी भी जय-हिन्द स्वरों से गाती है
ध्यान करो गिरधारी का,अब भृकुटि बंक सा नाद करो
अब वैमनस्यता छोडो मोदी उस इन्दिरा को याद करो
कश्मीर हमारा मस्तक है ,अब उसका ये दाग हटाना है
जो लुटा दिया था गलती से, वो भू-खण्ड दुबारा पाना है
अपने ही घर के खर्चो से, हम कब से दुश्मन पाल रहे
इनकी हर टुच्ची हरकत को हम शदियो से क्यों टाल रहे
आजाद करो इन फौजों को अब ज्यादा ना संवाद करो
अब वैमनस्यता छोडो मोदी उस इन्दिरा को याद करो
ये नंग- मतंग पडोसी हैं, दो वक्त की रोटी पास नही
आतंकवाद पनपाता हैे, औकात जगत में खास नही
कश्मीर सियासत के कारण ये मानचित्र में जिन्दा है
ये गिद्व-चील जो बनता था,अब तो परहीन परिन्दा है
जो करना है वो कर डालो, ना सरिता में अब गाद करो
अब वैमनस्यता छोडो मोदी उस इन्दिरा को याद करो
अब तक जो कुछ हम झेल गये,उसका उपचार जरूरी है
तुम अपने भाषण याद करो ,ये युद्व आज मजबूरी है
इस मूक - चूक की भांषा से कितने निर्दोष गंवाओगे
अगर समय से नही चेते, घर में ही मूंह की खाओगे
कवि आग की मानो बस, अब उठो, बढो अाल्हाद करो
वैमनस्यता छोडो मोदी अब उस इन्दिरा को याद करो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग

No comments:
Post a Comment