यु0पी0 की दल-दल
यू.पी में अब खण्डित, पण्डित,नेता महिमा मण्डित ढूंढो
अगडे,पिछडे,कौम,कबीले,जाति ,मजहब में दण्डित ढूंढो
हिन्दू,मुस्लिम लडा सकें जो, टुच्चे और विखण्डित ढूंढो
भानूमति का थर्ड-मोरचा, चण्ड, मुण्ड से चण्डित ढूंढो
बीजेपी.तुम मन्दिर,मस्जिद की जिद पकडो अडते जाओ
मिंया मुलायम हाथी पकडो,साइकिल लेकर बढते जाओ
माया ,काशीराम को पकडो,(ग) गणेश को गढते जाओ
दागी, बागी खडे उठो तुम, गले राष्ट्र के पढते जाओ
अब कांग्रेस में मात्र प्रियंका एक बची हेै उसे घुमाओ
टूटे - फूटे अपशिष्ठों से बोलो गाल बजाते जाओ
राहुल भैय्या ब्रह्मचारी है उसका बाजा खूब बजाओ
नेहरू, इन्दिरा औेर बापू के भजन सियासी गाते जाओ
देश की नंगी - भूखी जनता इन टुच्चो पर मेहरबान हेै
आज राष्ट्र की राजनीति में हिन्दू है या मुशलमान हेै
हर मजहब के सीखे-सिखाये तोते अपना भजन गायेंगे
सम्प्रदाय की खबर सियासी सारे चैनल दिखलायेंगे
ये चौथे स्तम्भ राष्ट्र के अब अपना ईधन सुलगायेंगे
जो ज्यादा धन देगा इनको उसको ही ये जितवायेंगे
हर चैेनल पर चर्चा होगी कौन हैे आगे कौन है पीछे
चैनल की सूखी बगिया को नेता जी सब मिलकर सींचे
यादव, कुर्मी, जाट, बहेलिये, अगडे - पिछडे तेली छांटो
अपने - अपने औजारों से सबके टुकडे - टुकडे काटो
जाति, मजहब में गंगा-यमुनी तहजीबों के जूमले बांटो
बाबा, माई और मौलवी घर - घर जाओ तलुवे चाटो
प्रजातन्त्र के इस सर्कस मेें सब जोकर तैय्यार खडे हेैं
थर्ड-मोरचे में भी देखो, लुटे - पिटे सब यार खडे हैं
चोर - चोर मौसेरे भाई अब अपना बीहड ढूंढ रहे हैं
कविताओं को शस्त्र बनाकर कवि आग भी मूंड रहे है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग

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