ना-पाक पाक
पाकिस्तान पर लिखना भी मुर्दो को गलूकोष चढाना है
ये मौत के मूँह में खडा हुआ,जीना तो एक बहाना है
अपनी ही खिलती कलियों को बेसमय मसल ने वाला है
हम क्या लिखें इन मुर्दो पर,खुद अपना खून निवाला है
दहशत-गर्द के राष्ट्र -गीत, अब आतंकवाद ही गाना है
पाकिस्तान पर लिखना भी मुर्दों को गलूकोष चढाना है
जिस नवाज को पता नही कौमो के ठौर-ठिकाने का
जिसको खुद रस्ता पता नही अपनो के आने-जाने का
शब्दों पर जिसको नाज नही,जिसके मुँह में आवाज नही
जो भीख मांग कर जीता है,अपने घर में कुछ काज नही
किस मुँह से इसको देश कहें ,ये तो यतीम का खाना है
पाकिस्तान पर लिखना भी मुर्दो को गलूकोष चढाना है
खैरात मिली तो पैसा भी आतंक के मूँह में डाल दिया
कोई पूछे पैसा कंहा गया, सैना के उपर टाल दिया
जहा दहशत-गर्द दरिन्दे भी अपने ही घर में पलते हेैं
जंहा बुझे चिरागों की लोै से, अपने ही घर खुद जलते है
जिसने कुरूआन की आयत से मरना मिटना ही जाना है
पाकिस्तान पर लिखना भी मुर्दो को गलूकोष चढाना है
जंहा फौजे मौज उडाती हो, बन्दूक का साया भारी हो
जंहा सात दशक से मुर्दों में बस,मरने की मारा-मारी हो
जो पाल रहे हों चूहों को ,बे - मौत फना करवाने को
तैय्यार खडी हो कौमे जो, जन्नत से दो-जख जाने को
कहने को पाकिस्तान बना,मुजरिम का मुमकिन थाना हेै
पाकिस्तान पर लिखना भी मुर्दो को गलूकोष चढाना है
जो काशमीर की घाटी की माटी में मिलना चाहते हैं
जो हमसे पंगे लेकर भी फिर बिना मौत मर जाते हैं
बच्चों को पैसा देकर के हम पर पत्थर फैंकवाता है
जिस हफीज का ओसामा, और बग्गदादी से नाता है
जिसकी आतंकी दुनिया को,दुनिया ने खुलकर जाना है
पाकिस्तान पर लिखना भी मुर्दो को गलूकोष चढाना है
जंहा मौत मदरसे पाल रही, मासूम मरे विस्फोटों से
जंहा घायल जनता जीती है, रोती है घाव की चोटों से
जंहा अमन चैन की बात नही,जंहा भांषा में जज्बात नही
जंहा मानवता की बात नही,जिनकी जग में औकात नही
कवि आग की भांषा में यहा मौत ही मौत तराना है
पाकिस्तान पर लिखना भी मुर्दो को गलूकोष चढाना है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815

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