गऊ-गंगा-गायित्री
गऊ माता गलीगली जाती है,गन्ध घरों का क्यों खाती है
मालिक का है दूध का नाता, हिन्दू के घर में गऊ माता
गऊ माता तो घास का तरसी, हिन्दू के घर देखो जर्सी
साण्ड सड.क में घूम रहा है , धरम देश में झूम रहा है
साण्डों का सड.कों से नाता , व्यापारी के डण्डे खाता
जीवन डण्डो में अर्पण है ,ये तो नीलकण्ठ का गण है
धरम गाय को खोता जाता,ट्रस्ट बनाकर चन्दा खाता
कम चारे में दूध अधिक है ,कैसे रक्षक बने वधिक हैं
तैंतिस कोटि देव धरती है ,चौराहे पर क्यों मरती है
प्रत्यक्ष दृष्टि श्रृष्टि का धन है , धेनु धरा का अवलम्बन है
ब्रह्मा विष्णु शिव का घर है ,लक्ष्मी का भी घर गोबर है
स्वर्ग -मोक्ष की ये सीढी है , पीडि.त काम-धेनु पीढी है
काम-धेनु अब-दाम धेनु है ,श्रृष्टि में निकुष्ट मनु है
धरम् में आडम्बर होता है , राष्ट्र धरम् को क्यों खोता है
मठ मन्दिरऔर धर्म ठिकानों,माता की इज्जत पहचानों
गऊ माता की गाथा गाओ ,गाय गली से घर में लाओ
सतयुग ,त्रेता ,और द्वापर में ,धेनु की पूजा घर - घर में
इतिहास हमारा बोल रहा है ,पाेल धर्म की खेाल रहा है
हिन्दू गायित्री गाता है , अकल से पैदल हो जाता है
मन्त्र ज्ञान का झगड जारी,धरम् का धन्धा कितना भारी
गंगा हिम से स्वच्छ निकलती कू-कर्मी के मल को मलती
गंगा जल व्यवसाय बनाया नंगों ने गंगा को खाया
गौमुख से भागीरथ लाया बंश सगर का पार लगाया
महिमा प्रदूषण की न्यारी गंगा पर भी धन्धा जारी
गऊ गंगा गायित्री खोती , तीनों धर्मों पर हैं रोती
तीनो से होता है धन्धा , हिन्दू देखो कितना अन्धा
सत्य सतत् सीधा होता है ,भक्त धर्म को क्यों खोता है
देखो आडम्बर जारी है , धरम का धन्धा लाचारी है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
मो09897399815

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