Thursday, October 1, 2015

भ्रष्टाचार के स्रोत
इस राजनीति में, चमत्कार कैसा है भाई
पाॅंच साल में कई करोड़ की खरी कमाई
नॅगा, भूखा, रेडी, खोंचे , खींचने वाला
प्रजातन्त्र के जनमत ने लावारिस पाला
हमें बताओ,इतनी माया कंहा से आयी
इस राजनीति में,चमत्कार कैसा है भाई

शेखर, सूभाष, भगत सिंह, गाॅंधी को देखा
राष्ट्र-भक्ति को अर्पित , सारा जीवन फेंका
रोटी को मोहताज पढे़ थे ,पर जूनून था
राष्ट्र बचे,बस,हिन्दु, मुस्लिम एक खून था
कौम कबीलो की तुमने क्या रेल बनायी
इस राजनीति में, चमत्कार कैसा है भाई

उसी देश में आज डकैती , खादी वर्दी
क्यों प्रजातन्त्र का मूलमंत्र है गुण्डागर्दी
हर लुच्चा, जन-मत से उॅंचा हो जाता है
राष्ट्र-द्रोह क्यों, राष्ट्र-गीत मिलकर गाता है
पाखण्डी नेताओं ने ये रीत बनायी
इस राजनीति में, चमत्कार कैसा है भाई

हम जैसे मुर्दे, अन्धों की क्या परिभांषा
चोरों में भी ढूॅंढ रहे हैं , तोला, मासा
डेढ़ अरब में यक्ष-प्रश्न अब भी जिन्दा है
ये मुर्दा मानव, जिन्दों में भी ,शर्मिदा है
क्यों चोर,लुटेरे,डाकू, घर में बने जॅंवायी
इस राजनीति में, चमत्कार कैसा है भाई

चोर डकैती भारत में ही क्यों पलती है
संविधान का जनमत जनता की गलती है
गाॅंधी वादी , खादी , चाॅंदी काट रहे हैं
संविधान की चटनी नेता चाट रहे हैं
डर लगता है देख के नेता की परछायी
इस राजनीति में,चमत्कार कैसा है भाई

अब साडी,धोती,स्कूटी, लैपटोप को बांटो
नंगे - भूखे वोटर बस्ती - बस्ती छांटो
अगडे - पिछडे, उजले, कुचले ढूंढो भाई
चौबीस घण्टे बिजली पानी की सप्लाइ
जाति मजहब की खोद रहे हैं नेता खायी
इस राजनीति में, चमत्कार कैसा है भाई

है मर्द यॅहा ,जो नेता की माया खंगाले
ये भुजंग, भारत भूमि में किसने पाले
डेढ़ अरब में ,कोई तो, उठकर के बोलो
चमत्कार की गठडी को हिम्मत से खोलो
कवि आग ने चिन्गारी हर दम सुलगायी
इस राजनीति में, चमत्कार कैसा है भाई ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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