गांधी के नाम चिटठी
बापू तुम क्यों राजघाट में खडे. हुए हो
अब तो कदम बढाओ चुप क्यों पढे हुए हो
स्वालम्बी अभिलाशा के सपने देखे थे
क्रांति भ्रांति के सब नायक अपने देखे थे
बापू तेरे नामों की चर्चा जारी है
शरण में तेरी भारत के नेता भारी हैं
तेरा नाम सहारा घर अपना भरते हैं
भेाग विलास की बैतरणी नेता तरते हैं
उपवासो से तेरा जीवन भरा पढा है
गांधीवादी हर भोगों में आज खडा है
तुम पैदल, चेले गाडी में घूम रहे हैं
खद्दर धारी लोकसभा में झूम रहे हैं
एअर - कण्डीशन गाडी भी सरकारी है
खर्चे लाख करोडों में कितने भारी हैं
नंगेपन के नेता चंगे बन जाते हैं
बापू, नेता राजनीति में सब खाते हैं
बापू तुमने जीवन भर बकरी पाली थी
बहती दूध दही की नदियां और नाली थी
आज तो नकली दूध वतन पूरा पीता है
मजबूरी है तेरे नाम से ही जीता हैं
मांस मदिरा देश की इज्जत बचा रहा है
आज देश को भ्रष्ट आचरण पचा रहा है
यौवनता के लैला मजनूं घूम रहे हैं
बलात्कार शिखरों को देखो चूम रहे हैं
तेरे नंगे पन में भारत भाव भरा था
आजादी की चोटों का हर घाव हरा था
अब तो कपडों में भी नंगा पन आता है
बच्चों से शर्मिंदा क्यों भारत माता है
हिंदू मुश्लिम झगडे में कितने मरते हैं
राजनीति में धर्म मजहब आगे करते हैं
राजनीति के दल से भारत भरा पडा है
सम्मान देश का चौराहे में आज खडा हैं
राजनीति में घोटाले अब भी जारी हैं
प्रजातंत्र में जनता के सेवक भारी हैं
बापू, नेता वतन की इज्जत चाट रहा है
भारत को टुकडों -टुकडों में बांट रहा है
सांसद और विधायक भी पेंशन पाते हैं
पूरा वतन कर्ज में ये वेतन खाते हैं
बापू, सत्ता सुख में सेवक फूल रहे हैं
जनमत जनता से पाते हैं भूल रहे हैं
पराधीन शिक्षा का कोई मेाल नही था
स्वाधीन शिक्षा हो तेरा बोल यही था
स्कूलों से बच्चे बाहर घूम रहे हैं
तेरे नाराें से विद्यालय सब झूम रहे हैं
पागलपन को तुम ही सीधा कर सकते हो
अमन चैन भारत में फिर से भर सकते हो
अब तो सारे नेता तुम को छोड रहे हैं
भारत को महाभारत पथ में मोड रहे हैं
अब सभी विरोधी तेरा ही गाना गाते है
तेरे साथ में अपनी फोटो छपवाते है
सब धीरे - धीरे तेरा पत्ता काट रहे हैं
नये ढंग का गांधी - वादी छांट रहे हैं
बापू डण्डा लेकर के सडकों पर आओ
गांधीवादी चेलों को कुछ तो समझाओ
राजनीति की औखाते तुम जान जाओगे
राजघाट में मेरी ही कविता गाओगे
राजनीति के चर्खे में कुछ परिवर्तन लाओ
राजघाट से हाट बाट में कदम बढाओ
ये डेढ अरब तेरी लाठी से सुधर जायेंगेे
ये खद्दरधारी राष्ट्रगीत फिर से गायेंगे ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:
Post a Comment